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कमजोर बच्चों की लगाई एक्सट्रा क्लास, 6.37% सुधरकर 65.63% आया रिजल्ट, 15वें से 8वें नंबर पर पहुंचा रोहतक

3 वर्ष पहले
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डॉक्टर बनकर ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों की सेवा करना ही लक्ष्य

हरियाणा बोर्ड 12वीं कक्षा के रिजल्ट में जिले की स्थिति सुधरी

भास्कर न्यूज | रोहतक

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने शुक्रवार को 12वीं कक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया। वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 का रिजल्ट 6.37 फीसदी ज्यादा आया। इस वर्ष जिले का ओवरऑल रिजल्ट 65.63 फीसदी रहा। वहीं, प्रदेश 15वें स्थान से उछलकर प्रदेश में 8वें स्थान पर आ गया है। रेवाड़ी 72.38 प्रतिशत रिजल्ट के साथ टॉप पर रहा। इस बार भी लड़कों की तुलना में लड़कियां कहीं आगे रही। जहां केवल 58.79 फीसदी लड़के पास हुए, वहीं, लड़कियां 74.57 फीसदी पास हुईं। रिजल्ट में सुधार होने पर जिले की डीईओ सुनीता रुहिल व डिप्टी डीईओ रोहताश वर्मा ने सफलता का श्रेय बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों की मेहनत को दिया है। वहीं, सबसे बड़ा असर विषयों में कमजोर पाए गए बच्चों पर फोकस कर एक्सट्रा क्लास लगाने का रहा।

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लड़कियां रहीं आगे

कैटेगरी परीक्षार्थी पास पास % रिजल्ट सुधार

लड़के 6362 3740 58.79 7.86

लड़कियां 4876 3636 74.57 2.55

इन 5 वजह से सुधरा रिजल्ट

1. अधिकारियों की ओर से मॉनीटरिंग और समीक्षा किया जाना।

2. मंथली एसेसमेंट टेस्ट में विषय में कमजोर छात्रों पर फोकस।

3. सक्षम प्रोजेक्ट के तहत गुणवत्ता सुधारने की हिदायत जारी करना।

4. शिक्षकों की ओर से 10वीं व 12वीं कक्षा के बच्चों के प्रगति रिपोर्ट से अभिभावकों को अवगत कराना।

5. कमजोर विषय वाले बच्चों को एक्स्ट्रा क्लास देकर सुधारना।

पांच वर्ष में यूं घटता-बढ़ता रहा रोहतक जिले का रिजल्ट

वर्ष पास परीक्षार्थी (फीसदी में)

2013 68.34

2014 78.97

2015 51.79

2016 64.69

2017 59.26

2018 65.63

बगैर कोचिंग के ही किसान के बेटे साहिल ने प्रदेश में पाया तीसरा स्थान

भास्कर न्यूज | महम

बिना किसी कोचिंग सेंटर में जाकर भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए केवल जज्बे और अपने लक्ष्य पर केंद्रीत होने की जरूरत है। महम के बीपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मेडिकल स्टूडेंट साहिल ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं की कक्षा में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त करने के बाद यह बात कही। उसके 500 में से 487 नंबर हैं। साहिल के पिता राजेंद्र किसान हैं और माता सुमन गृहणी हैं। साहिल ने कहा कि मैं डाॅक्टर बनकर अपने गांव और आसपास क्षेत्र के लोगों की सेवा करूंगा।

साहिल का कहना है कि नकल से छात्र कुछ हद तक अच्छे अंक तो प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन टॉप स्थान नहीं पा सकते। टॉप जगह पर जाने के लिए नकल की बजाय अक्ल से प्रश्नपत्र हल करना पड़ता है। छात्र का कहना है कि स्कूल प्रबंध निदेशक धर्मेन्द्र धत्तरवाल, अध्यापकों और माता-पिता ने समय-समय पर उसका हाैसला बढ़ाया।

महम. टॉपर छात्र साहिल के साथ खुशी मनाता स्कूल स्टाफ।

खेलों की बजाय पढ़ाई में रही अधिक रुचि

स्कूल एमडी सोनू धत्तरवाल का कहना है कि साहिल की खेलों की बजाय पढ़ाई में अधिक रुचि है। वह कभी-कभी वालीबॉल खेलता है।

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