सरकारी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है, लेकिन यह निर्देश भी हैं कि सुबह की पानी में स्कूल खोलकर विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन बांटा जाए। पर इसकी हकीकत क्या है, यह गुरुवार को हुए एक औचक निरीक्षण से साफ हो गई।
बीआरसी, बीएसी और जन शिक्षक ने जब 6 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया तो उसमें से 5 बंद मिलीं। पूछने पर स्थानीय लोगों ने बताया कि न मध्यान्ह भोजन बना था न ही शिक्षक यहां आए थे। सिर्फ एक स्कूल ही खुली मिली जहां विद्यार्थी मध्यान्ह भोजन करते मिले। गौरतलब है कि पिछले पखवाड़े हुई टीएल बैठक में कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश भी दिए थे कि औचक निरीक्षण करें और पता लगाएं कि एमडीएम ईमानदारी से बांटा जा रहा है कि नहीं? पर अधिकारियों ने यह जांच करने में पूरे पखवाड़े भर का समय लगा दिया।
जानकारी के मुताबिक गुरुवार को बीअारसी आलोक बलैया, बीएसी अरुण दुबे, अभय वर्मा एवं जनशिक्षक दिनेश दीक्षित ने विभिन्न स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। बंद मिली पांचों स्कूलों के पंचनामा भी तैयार कराए गए हैं। बताया गया है कि मिडिल स्कूल महाराजपुर सुबह 10.40 बजे बंद पाई गई। यहां मध्याह्न भोजन नहीं बना था। इसी प्रकार प्राइमरी और मिडिल स्कूल सिमरिया डोभी जब 11 बजे अधिकारी पहुंचे तो वह भी बंद मिली।
लोगों ने बताया न शिक्षक आए थे न एमडीएम बांटा गया। इसी दौरान प्राइमरी और मिडिल स्कूल डोभी का निरीक्षण हुआ तो वहां भी वैसी ही स्थिति मिली जैसी अन्य जगहों की थी। सिर्फ प्राइमरी और मिडिल स्कूल श्रीनगर में विद्यार्थी मध्यान्ह भोजन खाते हुए मिले। बंद मिली स्कूलों के स्व सहायता समूह संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए देवरी के जनपद सीईओ को अनुशंसा सहित पत्र लिखा गया है। ऐसा ही एक पत्र शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीपीसी को भी भेजा गया है।