ग्राम पंचायत मामाभांचा के 5 किसानों की भूमि में साल 2015-16 में मनरेगा के जरिए सुधार कराया गया था। लेकिन इसमें काम करने वाले 200 से ज्यादा मजदूरों को अब तक भुगतान नहीं किया गया है। सोशल आडिट में मामले का खुलासा होने के बाद अब मजदूर को रकम मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण पिछले दो साल से जनपद और जिला पंचायत का चक्कर काटकर थक चुके हैं। जनदर्शन, लोक सुराज अभियान में आवेदन भी दे चुके है। मजदूर हेमलाल, देवानंद, किसन ने बताया कि 2015-16 में भूमि सुधार व गहरीकरण में करीब तीन सप्ताह तक मजदूरी की। लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया है, कई बार जनपद और जिला पंचायत का चक्कर काट चुके हैं।
सामाजिक अंकेक्षण में मजदूरों भुगतान नहीं होना पाया गया : 18 मई को ग्राम पंचायत में सामाजिक अंकेक्षण किया, जिसमें 2015-16 में पांच किसान हीरालाल, जेठू राम, दशरथ, कृपा, भागवत की भूमि का सुधार मनरेगा के तहत मजदूरों के जरिए कराया गया था। जिसका भुगतान 50-50 हजार के हिसाब से मजदूरों को करना था लेकिन अंकेक्षण में कुछ मजदूरों का भुगतान नहीं होना पाया गया।
साफ्टवेयर अपडेट नहीं, इस कारण से नहीं हो पाया भुगतान : मनरेगा के पीओ खुबचंद वर्मा का कहना है जब डिजिटल पेमेंट चालू हुआ तो उस समय खाता पोस्ट आफिस और कापरेटिव बैंक में था। पोस्ट आफिस का खाता अभी भी प्रोसेस दिखा रहा है, वहीं कापरेटिव बैंक का खाता इनवेलिड हो रहा है लेकिन साफ्टवेयर में लंबित होने से दिक्कत हो रही है।
महासमुंद. मनरेगा के तहत किए गए भूमि सुधार कार्य।
15 दिन में भुगतान नहीं तो मुआवजा का हकदार
मनरेगा की धारा 3(3) के अनुसार श्रमिक साप्ताहिक आधार पर मजदूरी के भुगतान के हकदार होते है और किसी भी परिस्थिति में मस्टर रोल के बंद होने की तारीख से 15 दिन के अंदर मजदूरी भुगतान नहीं किया जाता है, तो रोजगार अधिनियम की अनुसूची के अनुसार मजदूरी प्राप्तकर्ता मस्टर रोल बंद होने के सोलहवें दिन के बाद के विलंब के लिए भुगतान न की गई मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से विलंब मुआवजे के भुगतान के लिए हकदार होता है।
महासमुंद. ग्राम पंचायत में सामाजिक अंकेक्षण के दौरान उपस्थित लोग।
जिला पंचायत को दी जा चुकी है जानकारी
सरपंच अश्वनी दीवान का कहना है कि मनरेगा के तहत 2015-16 में भूमि सुधार के लिए मजूदरों द्वारा कार्य किया गया था जिसका भुगतान आज तक नहीं किया गया है। जिला पंचायत व जनपद पंचायत को इसकी जानकारी लिखित और मौखिक रूप से दिया जा चुका है जिसके कारण से हर ग्राम सभा में सरपंच को मजदूरों के द्वारा भुगतान के लिए कहा जाता है।