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पिथौरा के 12 गांवों का पानी हुआ प्रदूषित कुछ घंटे में ही काला पड़ रहा पानी का रंग

3 वर्ष पहले
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महासमुंद| पिथौरा विकासखंड के 12 गांवों के पानी में अशुद्धि पाई गई है। मितानिन ने ब्लाक के सभी गांवों के पानी का परीक्षण किया है जिसमें 12 गांवों सार्वजनिक नलों, कुओं के पानी दूषित यानी पीने योग्य नहीं माना गया है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग दूषित पानी का सेवन कर रहे है।

पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता रमन उराव का कहना है कि जहां जहां गंदा पानी की रिपोर्ट आई है वहां पीएचई विभाग द्वारा एक बार फिर टेस्ट किया जाएगा। जांच सही पाए जाने की स्थिति में सार्वजनिक नल एवं कुओं के पानी का उपयोग में प्रतिबंध लगाया जाएगा और नए नलकूप का खनन किया जाएगा।

इन गांवों में मितानिनों को मिला दूषित पानी : पिथौरा विकासखंड के साई सराईपाली, सोहागपुर, नवागांव, कोदोपाली, बेल्डीह, बड़े टेमरी, राजा सवैया, भिथीडीह, डोंगरीपाली, पाटनदादर, घोंच, डुमरपाली ऐसे गांव है जहां के सार्वजनिक नल, कुआं में दूषित पानी पाया गया।

गांवों में दूषित पानी की शिकायत आ रही

मितानिनों ने अपने विभाग से मिले कीट से पानी की जांच की। पानी की जांच एक या दो दिन नहीं बल्कि मार्च से लेकर अप्रैल माह कई बार की गई। पिथौरा ब्लाक के 216 गांवों के सार्वजनिक नलों एवं कुओं का जांच किया गया जिसमें 12 गांवों के सार्वजनिक नल एवं कुओं में दूषित पानी आना पाया गया।

जांच में काला हो जाता है पानी यानी है दूषित

मितानिनों को रायपुर से कीट पानी की जांच के लिए मिला है। एक शीशी में 20 एमएल पानी डालना होता है। शीशी में पहले से जांच के लिए जड़ी डली हुई थी। 24 से 36 घंटा पानी शीशी में रखना होता है। शीशी में रखा पानी अगर काला हो गया तो वह दूषित और पीने योग्य नहीं है। जो पानी भूरा हो जाता है उसे पानी पीने योग्य माना गया।

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