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फर्जी पट्‌टे से मुआवजा दिलाकर खुद हड़पा

3 वर्ष पहले
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लहरौद स्थित बड़े झाड़ के जंगल मद में दर्ज जमीन को दलाल और पटवारी ने सांठगांठ कर दो लोगों के नाम पर दर्ज करा दिया। बाद में एनएच निर्माण के अधिग्रहण का मुआवजा इनके नाम पर मिला तो जमीन दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों के मिली रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। मामले की जांच में इस बात का खुलासा हुआ। प्रशासन के आदेश पर पिथौरा निवासी लक्ष्मी नारायण अग्रवाल उर्फ फुन्नु सेठ और पटवारी बेंजामिन सिक्का के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्ष्मण पिता इतवारू ने अफसरों को बताया कि उसके नाम पर जमीन कैसे आई वह नहीं जानता। मोहन अग्रवाल ने लहरौद में उसके नाम पर पट्टा होने की जानकारी दी थी। लक्ष्मण को एनएच भू अर्जन से चार अलग-अलग खसरा में कुल 57 लाख छत्तीस हजार सात सौ 24 रुपए मिले। लक्ष्मण ने बताया कि प्राप्त मुआवजा से लक्ष्मी अग्रवाल उर्फ फुन्नु ने 33 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवाए। बदले में फुन्नु सेठ ने डिघेपुर की 7 एकड़ जमीन उसके नाम पर रजिस्ट्री करने की बात कही थी। लेकिन 03 साल बाद भी रजिस्ट्री नहीं हुई। डोंगरीपाली निवासी भुनेश्वर पिता शौकीलाल ने बताया कि उसके नाम पर लहरौद जमीन होने की जानकारी उसे भी नहीं थी। जमीन खरीददार विकास अग्रवाल को भी नहीं जानने की बात कही।

पूर्व जिलाध्यक्ष ने की थी शिकायत

मामले में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अमरजीत चावला ने साल भर पहले लहरौद के भूमि अधिग्रहण में शासकीय मद की भूमि विक्रय एवं मुआवजा भुगतान के संबंध में शिकायत की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर द्वारा इसे समय सीमा में रखा गया था और जांच प्रतिवेदन मंगाए जाने के बाद राजस्व अमले द्वारा दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 420,34 के तहत अपराध दर्ज किया गया। 49 लाख रुपए ठगी के इस मामले में एडिशनल एसपी संजय ध्रुव ने बताया कि मामले में त्वरित जांच के बाद दोनों आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

जांच में इन बातों का हुआ खुलासा

एसडीएम द्वारा की गई जांच में यह बातें सामने आई कि लहरौद के लक्ष्मण पिता इतवारी और भुनेश्वर पिता शौकीलाल के नाम पर व्यवस्थापन के नाम पर दर्ज इन जमीनों के व्यवस्थापन मामला का कोई रिकार्ड नहीं है। तहसीलदार पिथौरा के द्वारा 2006-07 में पारित आदेश के अनुसार भूमि स्वामी हक पाने से विवरण दर्ज है। ग्राम लहरौद के इन दोनों व्यवस्थापन के प्रकरण की मांग किए जाने पर तहसीलदार ने बताया कि उक्त प्रकरण न तो तहसील अभिलेखागार में हैं और न ही जिला अभिलेखागार में। दायरा पंजी वर्ष 2006-07 थाना महासमुंद में जब्त होना बताया गया है ।

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