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बस्तर में बढ़ा फोर्स का दबाव तो अब लाल लड़ाकों ने बदली जगह, ओडिशा बॉर्डर पर बढ़ गई सक्रियता
बस्तर में फोर्स के बढ़ते दबाव को देखते हुए नक्सलियों ने अपने लाल लड़ाकाें को अलग-अलग एरिया में शिफ्ट कर दिया है। यही कारण है कि ओडिशा बॉर्डर पर पिछले कुछ दिनों से नक्सलियों की आमद बढ़ गई है। क्षेत्र में लगातार हो रहे मूवमेंट के चलते पुलिस भी अलर्ट है। ओडिशा बॉर्डर से लगे थाना क्षेत्रों में सर्चिंग तेज कर दी गई है।
पुलिस की मानें तो बॉर्डर एरिया पर उनकी नजर है और हर एक गतिविधि पर ध्यान दिया जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में बस्तर के जगरगुंडा और किस्टाराम क्षेत्र में 20 से अधिक कंपनियां तैनात हुई है। इन कंपनियों के आने से नक्सलियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। यही कारण है कि नक्सलियों ने लाल लड़ाकों को अभी सेफ जोन पर शिफ्ट किया है। फिलहाल महासमुंद क्षेत्र को नक्सली सेफ जोन के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि बस्तर में फोर्स का अधिक दबाव होने पर वे गरियाबंद, महासमुंद के रास्ते ओडिशा में छिपने के लिहाज से जाते हैं। महासमुंद जिला नक्सलियों के बीबीएम (बरगढ़, बलांगीर, महासमुंद) एरिया में आता है।
गंभीर हालात
गोमर्डा अभ्यारण क्षेत्र में पहुंचे थे नक्सली, तेंदूपत्ता तोड़ाई करने वालों से लेवी की मांग
राशन खरीदने और खाना बनाने की सूचना
महासमुंद जिले में सिंघोड़ा और टुहलू के आसपास नक्सली प्रभावित एरिया माना जाता है और नक्सली अक्सर इसी रास्ते से ओडिशा के जंगलों में जाते हैं। पुलिस की मानें तो पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में नक्सलियों के राशन खरीदने और जंगल के भीतर खाना बनाने की लोकेशन मिल रही है।
हाल ही में गोमर्डा अभ्यारण में देखे गए थे नक्सली
कुछ दिन पहले सराईपाली और सारंगढ़ के बीच में स्थित गोमर्डा अभ्यारण क्षेत्र में नक्सलियों को देखने की सूचना पुलिस को मिली थी। यहां तेंदूपत्ता तोड़ाई करने वालों ने हथियारबंद नक्सलियों को देखा था। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने कहा कि तेंदूपत्ता तोड़ाई सीजन को देखते हुए ओडिशा से लगे सीमावर्ती नक्सल प्रभावित थाना सिंघोडा, बलोदा और टूहलु चौकी को सर्चिग तेज करने और हर गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।