मितानिनों की हड़ताल के कारण समय पर इलाज नहीं मिला, एक का गर्भपात
जिला मितानिन संघ ने पटवारी कार्यालय के सामने 14 मई से अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है। महीने के तीसरे बुधवार को गर्भवतियों का टीकाकरण, एचआईवी टेस्ट सहित अन्य जांच किया जाता है, लेकिन हड़ताल के चलते यह नहीं हो पाया। मितानिन अपने पास दवा किट भी रखती हैं और टीवी व कुष्ठ की दवा भी ग्रामीण मितानिन की देखरेख में सेवन करते हैं। हड़ताल की वजह से ऐसे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
15 मई को घोघरा की एक महिला का समय पर जानकारी और उपचार नहीं मिलने से 4 महीने का गर्भपात हो गया। महिला को चार माह का गर्भ था, मंगलवार सुबह जब महिला को समस्या हुई तो परिजनों ने मितानिन को फोन किया। लेकिन तब तक मितानिन हड़ताल में शामिल होने के लिए महासमुंद पहुंच चुकी थी। इसके कुछ देर बाद दोबारा मितानिन के पास फोन आया कि महिला का गर्भपात हो चुका है।
महासमुंद| पटवारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठीं मितानिन।
हड़ताल में जाने से इस तरह हो रही परेशानी...
दाई से कराना पड़ा प्रसव
अमलोर में भी 15 मई को मितानिन के उपलब्ध नहीं होने से गर्भवती को अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया तथा महिला का प्रसव दाई के माध्यम से घर में ही कराना पड़ा।
केस-1
स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन इनके भरोसे
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में मितानिन मुख्य भूमिका निभाती हैं। भले ही स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता पदस्थ रहते हैं लेकिन सभी गांवों में पदस्थापना नहीं है। पल्स पोलियो टीकाकरण, परिवार नियोजन, गांव में बीमारी होने पर दवाई का वितरण, नवजात की सुरक्षा, पोषण पुनर्वास, संस्थागत प्रसव समेत अन्य कार्यक्रमों में सहयोग करती हैं। लेकिन मितानिनों को नाम मात्र का अंशदान मिलता है।
मजबूरी में हो रहे घर में प्रसव
मितानिनों का काम गांव की गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल लेकर आना है। हड़ताल की वजह से मितानिन काम नहीं कर रही है, जिसके चलते मोंगरा, भलेसर, नांदगांव, पडरीपानी में गर्भवती महिलाओं का घर में ही प्रसव कराया गया।
केस-2