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8वीं तक के 24 हजार बच्चों को नहीं आता पढ़ना, फिर भी पास

3 वर्ष पहले
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जिले में पहली से लेकर कक्षा आठवीं तक के 24696 बच्चों को शिक्षा सत्र 2017-18 में ई-ग्रेड मिला है। मतलब, इन बच्चों को पढ़ना लिखना नहीं आता और इन्हें उस कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों का न्यूनतम ज्ञान तक नहीं है। बावजूद ये सभी बच्चे पास हो गए और अब अगली कक्षा की पढ़ाई करेंगे। क्योंकि शिक्षा के अधिकार के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक का कोई बच्चा फेल नहीं हो सकता।

हाल ही में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के परिणाम जारी किए गए। जारी परिणाम चौंकाने वाले थे, क्योंकि जिले में कक्षा पहली से आठवीं तक 1 लाख 33 हजार 492 बच्चे अध्ययनरत थे, जिसमें से 24 हजार 696 बच्चों को ई ग्रेड मिला है। बताया जा रहा है कि इन बच्चों को हिन्दी व अंग्रेजी बारहखड़ी नहीं आती और गणित के गुणा-भाग भी वे नहीं जानते, फिर सवालों को हल करना तो संभव ही नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 100 प्रतिशत रिजल्ट इसलिए आता है कि किसी भी बच्चे को फेल करने या पूरक लाने की पात्रता नहीं है।

क्योंकि... ‘शिक्षा का अधिकार’ के तहत नहीं कर सकते फेल

एक शिक्षकीय स्कूल की व्यवस्था कितनी सार्थक है, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।

ई-ग्रेड का मतलब न्यूनतम ज्ञान भी नहीं

विभाग के अफसरों के मुताबिक ई ग्रेड का मतलब ये होता है कि बच्चे को उस कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों का न्यूनतम ज्ञान है ही नहीं। वहीं ए ग्रेड का मतलब बच्चे ने 81% से अधिक अंक अर्जित किया है। बी ग्रेड यानि बच्चे को 66 से 80% के बीच मिला है। सी ग्रेड का मतलब बच्चे ने 45 से 65 प्रतिशत अंक अर्जित किया है। डी ग्रेड मतलब बच्चे को थोड़ा बहुत ज्ञान है और उसे 33 से 45 प्राप्त हुए हैं।

डीईओ बोले-इस साल से पढ़ाई में और सुधार करेंगे

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी बीएल कुर्रे का कहना है कि शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को पास करना अनिवार्य है। जिन बच्चों को अक्षर ज्ञान नहीं है, लिखना-पढ़ना नहीं आता उसमें इस वर्ष सुधार का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों को नियमित स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इन बच्चों के लिए इस बार विशेष कक्षा संचालित करने की योजना बनाई जा रही है।

1. अनियमित उपस्थिति

कारण - बच्चों के अनियमित उपस्थिति के कारण भी परिणाम खराब होते हैं। क्योंकि बच्चा एक दिन आता है और दूसरे दिन गायब रहता है तो पढ़ाई में दिक्कत होती है।

उपाय बच्चों की अनियमित उपस्थिति पर प्रधान पाठक और शाला विकास समिति को सूचना दें। स्कूल में पैरेंट्स की बैठक बुलाकर बच्चों की 100 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करें। उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करें और समझाएं।

2. शिक्षकों का ध्यान न देना

कारण बच्चों पर शिक्षकों का ध्यान न देना भी इसका प्रमुख कारण है। बच्चे रोजाना स्कूल तो आते हैं, लेकिन शिक्षक ही पढ़ाई में ध्यान नहीं देते। इसलिए बच्चे ई ग्रेड से बमुश्किल पास हो रहे हैं।

उपाय प्रधान पाठक और शाला विकास समिति इस पर ध्यान दे। बच्चों से समय-समय शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए विषयों पर बातचीत करे। यदि किसी कक्षा में कमजोर बच्चे मिलते हैं तो उन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

एक्सपर्ट बोले-अनियमित उपस्थिति और शिक्षकों के ध्यान न देने से बने हालात

कक्षावार आंकड़े और ई ग्रेड प्राप्त बच्चों की संख्या

कक्षा विद्यार्थी ई ग्रेड

पहली 14992 4216

दूसरी 14974 3428

तीसरी 15010 3634

चौथी 15691 2744

पांचवी 16810 2262

छठवी 18564 3112

सातवी 18707 2857

आठवी 18707 2443

कुल 133492 24696

-टीआर वर्मा, शिक्षाविद् एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य

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