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शहर में 13500 मकान, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सिर्फ 270 में, अफसरों को जांचने की फुर्सत नहीं
शहर में कुल मकानों की संख्या 13500 है, लेकिन इनमें से केवल 270 मकानों में ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हुआ है। यही नहीं पिछले चार साल में पालिका क्षेत्र में 1235 नए मकान बने, लेकिन इनमें वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है या नहीं इसकी जानकारी पालिका को नहीं है। क्योंकि मॉनिटरिंग के लिए अफसर अब तक इन घरों में नहीं गए और न ही लोग इसकी सूचना देने और एफडीआर की राशि वापस लेने पालिका आए।
दरअसल, लगातार बढ़ रही पानी की समस्या को देखते हुए निर्माणाधीन नए भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है। बावजूद इसके लोग अपने घरों में सिस्टम नहीं बना रहे हैं। जबकि नए भवन के निर्माण की अनुमति मकान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने शर्त में ही दी जानी है।
पालिका ने अब तक नहीं की एक भी कार्रवाई : नवीन भवन निर्माण के समय भवन अनुज्ञा के समय ही पालिका वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए एफडीआर जमा कराती है। यह राशि निर्माणधीन भवन के एरिया के अनुसार तय होती है। नियमानुसार यदि लोग अनुमति के बाद भी अपने घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाते तो पालिका को उस एफडीआर की राशि से संबंधित भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना है, लेकिन अब तक पालिका एक भी घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बना पाई।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग का सरकारी सिस्टम ही खराब : सरकारी भवनाें में लगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ही खराब पड़ा हुआ है। नगर पालिका सहित, कलेक्टोरेट, एसपी कार्यालय, डाइट में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तो लगाया गया है, लेकिन देखरेख के अभाव में पाइपलाइन टूट चुका है। कई सरकारी भवनाें में लगा यह सिस्टम पूरी तरह से खराब है।
महासमुंद| सरकारी भवनों में भी नहीं लगाया गया है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।
लोगों को कर रहे प्रेरित
नगर पालिका के सहायक अभियंता बीआर साहू का कहना है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। साथ ही इसकी कड़ी मॉनिटरिंग करेंगे ताकि संबंधित नक्शे में दिखाए अनुसार वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कड़ाई से पालन हो सके। ।
ऐसे काम करता है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
वर्षा जल संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण अथवा एकत्रीकरण की इस प्रणाली में घरों की छतों पर पड़ने वाले वर्षा जल को गैलवेनाईज्ड आयरन, एल्यूमिनियम, मिट्टी की टाइलें अथवा कंक्रीट की छत की सहायता से जल को स्टोर करने के लिए बनी टंकियों में अथवा भूजल रिचार्ज संरचना से जोड़ दिया जाता है। इस प्रकार एकत्रित जल का उपयोग सामान्य घरेलू कामों के अलावा भूजल स्तर बढ़ाने में किया जाता है। इससे प्राकृतिक जल स्त्रोत हमेशा रिचार्ज होता रहता है, जिससे जमीन का वाटर लेवल नहीं गिरता है।
फैक्ट फाइल
शहर की जनसंख्या 70 हजार
शहर में मकानों की संख्या: 13500
चार साल में आए नए मकान के लिए आवेदन : 1235
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हुए मकानों की संख्या: 2 प्रतिशत
जानिए, इसलिए जरूरी है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
केन्द्रीय भूजल सर्वेक्षण, भारत सरकार के रिपोर्ट के अनुसार महासमुंद शहर में साल 2010 में भूजल 100 फीट नीचे आसानी से मिलता था, लेकिन 2017 में यही 255 फीट नीचे चला गया। साल 2016 में यह 240 फीट पर था। एक अनुमान के मुताबिक भूजल स्तर हर साल औसतन 20 फीट नीचे जा रहा है।
अनिवार्य है नए घरांे के लिए यह सिस्टम लगवाना
वर्ष 2009 से शासन ने सभी नगरीय निकायों में नए भवन के निर्माण के साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाना अनिवार्य किया है। अनुज्ञा जारी करते समय नपा द्वारा अमानत राशि के रूप में जमीन के साइज के हिसाब से राशि जमा कराई जाती है। मालिक की ओर से वाटर हार्वेस्टिंग के फोटोग्राफ्स आवेदन के साथ जमा करने होते हैं, जिसके बाद एफडीआर की राशि वापस कर दी जाती है।