मई अौर जून महीने में विवाह के सबसे ज्यादा मुहूर्त
एक महीने से चल रहा मलमास 14 अप्रैल से खत्म हो गया। विवाह के मुहूर्त 18 अप्रैल से शुरू होंगे, जो 11 जुलाई तक चलेंगे। 23 जुलाई से चार महीने के लिए देवशयनकाल शुरू हो जाएगा। हालांकि देवउठनी ग्यारस के बाद भी गुरु-शुक्र का तारा अस्त होने और मलमास के कारण कोई मुहूर्त नहीं है।
लोगों ने शादियों के लिए बाजार से खरीदारी करनी शुरू कर दी है। 11 जुलाई तक 36 दिन मांगलिक कार्य व शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। रामजानकी मंदिर के पुजारी नारायण वैष्णव ने बताया कि 18 अप्रैल से जुलाई तक की अवधि में शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए 36 दिन शुभ मुहूर्त रहेंगे। अप्रैल में 18, 24, 25, 27, 28 व 30 अप्रैल, मई में 1 से 13 मई तक, जून में 18 से 29 जून तक व जुलाई में 5, 6, 9, 10 व 11 जुलाई को विशेष शुभ मुहूर्त रहेंगे। देवउठनी एकादशी के बाद भी विवाह के मुहूर्त नहीं, जुलाई के बाद सीधे नए साल में शादियां होंगी। 11 जुलाई को इस साल विवाह का आखिरी मुहूर्त है। इसके बाद 23 जुलाई से 19 नवंबर तक देवशयनकाल रहेगा। देवउठनी एकादशी के साथ विवाह के मुहूर्त शुरू हो जाते हैं, लेकिन 17 से 31 अक्टूबर तक शुक्र का तारा अस्त रहेगा।
महासमुंद| शादी के लिए ज्वेलरी खरीदते हुए लोग।
23 जुलाई से सो जाएंगे देव
पंडित सुखेंद्र शर्मा कहना है कि 11 जुलाई के बाद शुभ मुहूर्त नहीं हैं। 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ देव सो जाएंगे। ज्योतिष पक्ष के हिसाब से इस अवधि में शुभ-मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम जरूर होंगे।
गुड़ियों का सजा बाजार
अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को है। इसे देखते हुए मिट्टी से बने गुड्डे गुड़ियों के विवाह के लिए सबसे अधिक प्रचलित है। बच्चे खेल के रूप में इन दिन गुड्डे गुड़ियों का विवाह करते हैं जिसके लिए बाजार में गुड्डे गुड़ियों का बाजार भी सज चुका है।