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छत्तीसगढ़ में औषधीय गुणों से भरपूर रंगीन गेहूंू की जैविक खेती

3 वर्ष पहले
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पंजाब और हरियाणा के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के केशवा गांव में में रंगीन गेहंूू की पूर्ण जैविक खाद के प्रयोग से खेती हो रही है। पंजाब और हरियाणा में इसकी सामान्य तौर पर खेती रासायनिक खाद का प्रयोग कर ली जाती है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में पहली बार ली जा रही फसल पूरी तरह से जैविक खाद के उपयोग से उगाई जा रही है।

केशवा में इसकी खेती कर रहे किसान मोहन चंद्राकर ने बताया कि सामान्य गेंहूू से इसका वजन अधिक होने के साथ स्वाद भी अच्छा है,जिसके कारण किसानों की आय में वृद्धि हुई है। वहीं बेकरी प्रॉडक्ट्स और ब्राउन ब्रेड बनाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके कारण इसकी खपत में कोई परेशानी नहीं है। रंगीन गेंहूू दिखने में जामुनी रंग का होता है साथ ही यह औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है। इसके कारण इस गेंहूू की मांग बनी रहती है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र के किसान रंगीन गेंहूू के लिए सीधे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय संपर्क कर इसकी खेती कर रहे हैं।

पहली बार

एक एकड़ में 8 क्विंटल की फसल उगाई, राज्य के साथ विदेशों में भी निर्यात करने की तैयारी

विदेश में निर्यात करने की तैयारी में हैं किसान

जिले के ग्राम केशवा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 1 एकड़ में पूर्ण जैविक विधि से रंगीन गेहूं की खेती की गई और उत्पादन भी 8क्विंटल आया। कम पानी में भी अधिक उत्पादन पाकर किसान खुश हैं वहीं इसे सीधे राज्य में और राज्य और देश के बाहर निर्यात करने की तैयारी भी की जा रही है।

महासमुंद। ग्राम केशवा स्थित खेत में लहलहा रही पर्पल ग्रेन की तस्वीर।

यह है खासियत

रंगीन गेंहूू में एंथोसाईनिंस की मात्रा अन्य सामान्य गेंहूू से अधिक होती है। एनएबीआई के अनुसंधान में यह पाया गया है कि सामान्य गेंहूू के अपेक्षा इसमें एंटी ऑक्सीडेंट 9 गुना तक अधिक होता है। मिली जानकारी के अनुसार इस गेंहूू में पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट शुगर, मोटापा, हार्ट अटैक की बीमारियों को दूर करने में काफी फायदेमंद साबित होता है।

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