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ब्रेजर से हटाए महेश्वरी व नर्मदा से जलकुंभी

3 वर्ष पहले
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नर्मदा व महेश्वरी नदी से जलकुंभी को निकालने और स्थायी समाधान को लेकर प्रयास शुरू हुए हैं। युवा संगठन ने अपने स्तर पर सफाई अभियान शुरू किया है। वहीं संभागायुक्त संजय दुबे ने 2 अप्रैल को नर्मदा घाटी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसमें जलकुंभी को हटाने के लिए ब्रेजर या स्पेशलाइज्ड मशीन उपलब्ध कराने अथवा किसी संस्था से आवश्यक बजट आवंटन करवाकर सफाई करवाने की बात कही है। संभागायुक्त दुबे ने लिखा महेश्वर आकर्षक पर्यटक केंद्र है। मार्च में ही नर्मदा नदी में जल प्रवाह नगण्य होने से विभिन्न प्रकार की जलकुंभी बढ़ गई है। महेश्वरी नदी भी जलकुंभी से ढंक गई है। महेश्वरी व नर्मदा के संगम स्थल पर जलकुंभी बढ़ी है। पानी की स्वच्छता व पर्यटन के हिसाब से बहाव निरंतर बनाए रखना जरूरी है।

पर्यटन
कमिश्नर ने अपर मुख्य सचिव को लिखा पत्र, 4 करोड़ 32 लाख रुपए आएगा खर्च
महेश्वरी व नर्मदा के संगम स्थल पर जलकुंभी जमा है।

4 करोड़ 32 लाख रुपए व्यय बताया
महेश्वरी नदी में मिल रहे गंदे पानी को रोकने के लिए सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर व जलकुंभी के स्थायी निदान पर 2 करोड़ 87 लाख रुपए का व्यय होगा। नर्मदा नदी के दोनों किनारों से जलकुंभी निकालने पर 1 करोड़ 45 लाख रुपए व्यय होंगे।

इंदौर के दल ने किया था निरीक्षण
संभागायुक्त के निर्देश पर 22 मार्च को गुड़ी मुड़ी केंद्र संचालिका शालिनी होल्कर के साथ मैकेनिकल इंजीनियर गौरव गुप्ता, अधीक्षण यंत्री एनएस तोमर, जोनल अधिकारी जीडी सुथार, नगर पालिक निगम इंदौर व नाविक संघ सदस्यों ने महेश्वरी व नर्मदा नदी से जलकुंभी निकालने को लेकर निरीक्षण किया था। नर्मदा व महेश्वरी नदी के दोनों किनारों पर करीब 6 किलोमीटर लंबाई में जलकुंभी पाई गई थी। इसके निराकरण के लिए अफसरों ने सुझाव भी दिए थे। इसमें बताया कि महेश्वरी नदी से होकर जलकुंभी नर्मदा में जाती है और कम गहराई वाले स्थान पर पनप जाती है। जलकुंभी बढ़ने से नाविकों के रोजगार पर भी असर हो रहा है। बाढ़ में जलकुंभी बहकर आगे चली जाती थी, लेकिन अब पानी का स्तर व बहाव कम होने से अधिक पनप रही है। इसे मशीन लगाकर ही हटाया जा सकता है।

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