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कठिन परिस्थितियों में बुजुर्गों ने साड़ी उद्योग को बचाया, ऐसा करें जो नई पीढ़ी याद करे

3 वर्ष पहले
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नर्मदा भवन में मंगलवार दोपहर चतुर्थ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह का आयोजन हुआ। हथकरघा विभाग के उपसंचालक प्रदीप कंकरेचा इंदौर ने कहा- कठिन परिस्थितियों में भी लोगों ने महेश्वरी साड़ी उद्योग को बचाए रखा। उद्योग को जिंदा रखने में बुजुर्गों की भूमिका अहम है। हम भी कुछ ऐसा काम करें कि आने वाली पीढ़ी याद करें। बुनकर सेवा केंद्र इंदौर के सहायक निदेशक संदीप थुब्रिकर ने कहा- 7 अगस्त 1950 में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। विदेशी कपड़ों की होली जलाकर स्वदेशी कपड़े पहनने को लेकर चर्चा हुई थी। इसकी याद में 7 अगस्त 15 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने का शुभारंभ किया। 95 प्रतिशत हाथकरघा वस्त्र भारत में बनाया जाता है।

महेश्वर व कसरावद को ब्लॉक स्तर क्लस्टर का दर्जा दिया गया है। योजनाओं के लाभ के लिए बुनकर इंडिया हैंडलूम ब्रांड में रजिस्ट्रेशन करवाएं। जीआई एक्ट में रजिस्ट्रेशन के बाद महेश्वरी उत्पाद यहीं बनेगा। बाहर बनाने वाला अपराध श्रेणी में आएगा। कार्यक्रम अध्यक्ष नप अध्यक्ष अमिता हेमंत जैन, मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि अश्विन पाटीदार, विशेष अतिथि विधायक प्रतिनिधि मनोज पाटीदार आदि ने भी संबोधित किया। भूपेंद्र जैन, वरिष्ठ बुनकर ओमप्रकाश मुकाती, महेश दाने, हस्तशिल्प विकास निगम प्रबंधक विजय देवांगन, जिला हथकरघा व प्रशिक्षण केंद्र सहायक संचालक राजकुमार सराफ, एनएचडीसी के वीके श्रीवास्तव, नप अध्यक्ष प्रतिनिधि हेमंत जैन, बसंत श्रवणेकर, हाथकरघा विभाग कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में बुनकर मौजूद थे।

7 अगस्त 1950 में विदेशी कपड़ों की होली जलाकर स्वदेशी कपड़े पहनने को लेकर चर्चा हुई थी

बुजुर्ग बुनकरों का मंच से उतरकर सम्मान किया।

संसाधनों के साथ मार्केटिंग की व्यवस्था की

अफसरों ने कहा- बुनकरों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर वस्त्रों की मार्केटिंग की व्यवस्था की है। डिजाइन स्टूडियो भी उपलब्ध कराया है। बुनकर व हस्तकरघा व्यापारी अपने उत्पाद की डिजाइन कम्प्यूटर पर तैयार कर सकते हैं। नेशनल हैंडलूम डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने यार्न डिपो खोला है। इसमें महेश्वरी साड़ी उद्योग से संबंधित कच्चा सामान मिल सकेगा।

20 बुजुर्गों व 8 बुनकरों का किया सम्मान

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में 20 बुजुर्गों व 8 बुनकरों को अतिथियों ने पुष्पमाला पहनाने के साथ स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। बुजुर्ग बुनकरों के सम्मान के लिए नप अध्यक्ष जैन मंच से उतरकर उनके पास तक पहुंची।

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त बुनकर अलाउद्दीन अंसारी का सम्मान किया।

नर्मदा की लहर देख बनाई थी साड़ी

राष्ट्रीय बुनकर पुरस्कार प्राप्त अलाउद्दीन अंसारी ने कहा- राष्ट्रीय बुनकर का पुरस्कार मां नर्मदा की कृपा से मिला है। एक दिन नर्मदा नदी में सूर्य की किरणों के साथ चलती लहरों को देखते हुए मन में नर्मदा लहर की चमकदार साड़ी बनाने का विचार आया। इसी साड़ी का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया गया।

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