अहिल्या घाट पर किले के झरोखे स्थित प्राचीन गंगा माता मंदिर का प्रचार-प्रसार नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। बाहर से आने वाले लोगों को पूछते हुए मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। यहां सूचना बोर्ड तक नहीं है। समाजसेवियों ने मंदिर के संरक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए सूचना बोर्ड लगाने की प्रशासन से मांग की। नर्मदा तट के तीन स्थानों पर इन दिनों पं. जगन्नाथ मिश्र रचित गंगालहरी कथा भी चल रही है। गंगा दशहरा पर्व के दौरान 10 दिनों तक मंदिर में पूजन का दौर चल रहा है। लेकिन किले के झरोखों में एक तरफ मंदिर होने से बाहर से पहुंचे श्रद्धालुओं को जानकारी नहीं मिल पाती। समाजसेवी पुरुषोत्तम गुप्ता व कैलाश सोनी ने कहा यह मंदिर गौरवशाली है। विशेष विद्युत व्यवस्था के अलावा मंदिर का उचित संरक्षण करना जरूरी है। सफाई व प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन को काम करना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में सरलता हो। साहित्यकार हरीश दुबे ने कहा हरिद्वार की तरह हर की पौड़ी पर होने वाली गंगा माता की आरती गंगा दशहरा पर्व पर नर्मदा तट पर भी होना चाहिए।