माही बांध के डाउन स्ट्रीम में माही नदी के दोनों किनारों पर 20 लाख की लागत से निर्मित की जा रही सीढ़ियों पर लगाई गई रेलिंग अभी से हिलने लगी है।
जिससे इन सीढ़ियों से चढ़ने और उतरने वाले लोगों को रेलिंग पर हाथ रखते ही गिरने का डर लगने लगता है। उल्लेखनीय है कि नदी के जल बहाव क्षेत्र में सीढ़ियों का निर्माण करवाने के लिए जल संसाधन विभाग से डिजाइन स्वीकृत नहीं करवाने से ये काम पंचायत विभाग की ओर से करवाने से इसमें वैसी मजबूती नहीं आ पा रही है, जैसी कि जल संसाधन विभाग के मापदंडों के अनुसार होनी चाहिए। वास्तव में सीढ़ियों का निर्माण फाउंडेशन एंकरिंग तकनीक से नहीं करना ही इस निर्माण कार्य की सबसे बड़ी खामी है।
मानसून से पहले इस काम को आनन फानन में करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन अंतर रार्ज्यीय महत्व की नदी के किनारों पर ग्रामीणों की सुविधा के लिए करवाए जा रहे निर्माण कार्य में अभी से ध्यान नहीं रखा तो मानसून के दौरान यहां बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए कभी भी असुरक्षा के हालात उत्पन्न हो सकते हैं। जिसका कारण ये है कि सिर्फ सरियों के सहारे लोहे के रेलिंग खड़े किए हुए हैं और जन सुरक्षा की दृष्टि से मजबूती का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। साथ ही ढलान पर नाम मात्र के लोहे सरियों का जाल बिछा कर सीढ़ियों का निर्माण करवा दिया गया है,जिसे लेकर लोगों में खासी नाराजगी है।
इस संबंध में जेईएन प्रवीण दोसी का कहना है कि काम सही हो रहा है और काम पूरा होने पर ही ठीक नजर आएगा। सारा काम मेरी देखरेख में किया जा रहा है। इस संबंध में सचिव हरीश सोनी ने बताया कि काम अच्छा हो रहा है। सीढ़ियों के नीचे ढाई फीट की जाल बिछाई गई है। फिर भी कोई कमी हो तो देख लेंगे।
गुणवत्ता गौण
जन सुरक्षा की दृष्टि से मजबूती का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, साथ ही ढलान पर नाम मात्र के लोहे सरियों का जाल बिछाया
माहीडैम। माही बांध के डाउन स्ट्रीम में माही नदी के किनारे पर निर्मित सीढ़ियों पर लगाए गए रैलिंग अभी से हिलने लगे हैं।