फसल बीमा और क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर 15 मई को क्षेत्र के किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल गरियाबंद पहुंचकर कलेक्टर व उप संचालक कृषि विभाग को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके विरोध में 18 मई को किसानों ने तहसील मुख्यालय के रेस्ट हाउस में बैठक कर उग्र आंदोलन की रणनीति बनाई और गांव-गांव में भी बैठक करने का निर्णय लिया।
किसान नेता हेमसिंग नेगी ने कहा कि जिले के किसान इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर फिर लूट और धोखाधड़ी के शिकार हो गए हैं। केन्द्र व राज्य सरकार ने फसल बीमा योजना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि अब किसानों को इससे बेहतर लाभ होगा। बार-बार मात्र 35 प्रतिशत फसल क्षति होने पर योजना का लाभ मिलने का प्रचार किया गया। किसानों ने फसल बीमा करवाया, लेकिन जब पिछले साल क्षेत्र में सूखा पड़ा तो किसान परेशान हो गए और जब फसल बीमा देने की बात आई तो हजारों किसानों को वंचित कर दिया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों में आक्रोश और सरकार के प्रति गुस्सा है।
बैठक में महेंद्र साहू, जगत राम ठाकुर, राम सिंग नागेश, थानूराम पटेल, पवन दीवान, कोमल जगत, शत्रुघन ध्रुव, मोहन साहू, इम्तियाज मेमन, रामकृष्ण ध्रुव, गंगाराम जगत, पुरन मेश्राम, गुलाम मेमन, प्रवीण बाम्बोड़े, पिलेश्वर सोरी, राकेश ठाकुर, पुरन, जगदीश नागेश, बल्देव नायक, सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। संचालन पुरन मेश्राम ने किया।
मैनपुर. रेस्ट हाउस में फसल बीमा व क्षतिपूर्ति राशि के संबंध में बैठक करते हुए किसान।
6 हजार ने कराया बीमा, सिर्फ एक हजार को मिली राशि
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष टीकम कपिल ने कहा कि ब्लॉक क्षेत्र में 6 हजार से ज्यादा किसानों ने फसल बीमा करवाया था, जिसमें मात्र एक हजार को बीमा राशि मिली है। इस मामले को लेकर गरियाबंद कलेक्टर को भी आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की शह पर बीमा कंपनी काम कर रही है।
राजस्व ने किया था खेतों का सर्वे
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रेमसाय जगत ने कहा कि फसल बीमा की मांग को लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अधिकांश किसानों को न तो फसल क्षतिपूर्ति मिली है और न ही बीमा की राशि, जबकि खेतों का कई बार सर्वे राजस्व विभाग द्वारा किया गया है।