मकराना में एडीजे कैंप कोर्ट को स्थाई करने और परबतसर में एक और एडीजे कोर्ट खोलने के विरोध में वकीलों के धरने और न्यायिक कार्य के बहिष्कार को शनिवार को 59 दिन पूरे हो गए। इसमें मकराना के अधिवक्ता क्रमिक अनशन पर बैठ रहे हैं। बार संघ के आह्वान पर एक भी अधिवक्ता पक्षकारों की पैरवी करने कोर्ट रूम में नहीं पहुंचता है। सिविल, फौजदारी व अन्य विचाराधीन प्रकरणों को लेकर अधिकांश पक्षकार अपनी तारीख पेशी पर नियमित कोर्ट पहुंचते हैं। कुछ पक्षकार अपने अधिवक्ताओं के भरोसे बैठे हैं। हालात यह है कि इस अवधि में विभिन्न आपराधिक प्रकरणों में आरोपियों के अधिवक्ता पैरवी के लिए कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। पक्षकार भी नहीं पहुंच पाए। नतीजा 90 आरोपियों की जमानत जब्त कर ली गई। उनके खिलाफ न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। अब उन्हें पुलिस वापस गिरफ्तारी करेगी। उसके बाद वे जमानत करवा पाएंगे। जमानत पर चल रहे कुछ पक्षकार चौकन्ने रहे और तारीख पेशी पर खुद नहीं पहुंच पाए तो अपने रिश्तेदार या परिजन आदि को कोर्ट भेजकर हाजरी माफी ले ली। हाजिरी माफी ले जमानत जब्त होने से बचाने वालों की संख्या कोर्ट के आंकड़ों के अनुसार 35 हैं। परबतसर में एडीजे कोर्ट होते हुए भी सरकार द्वारा बजट भाषण में एक और एडीजे कोर्ट खोलने की घोषणा के बाद से मकराना में अधिवक्ताओं ने 22 मार्च से आंदोलन शुरू किया था। सीएम को भी अवगत कराने के बाद कार्रवाई नहीं हुई।
59वें दिन पांच अधिवक्ता अनशन पर बैठे
बार संघ मकराना के तत्वावधान में अधिवक्ताओं के क्रमिक अनशन के 59वें दिन एडवोकेट भंवराराम डूडी, देवी सिंह राठौड़, विजय सिंह राजपुरोहित, बजरंग लाल व्यास और शंकर दान चारण अनशन पर बैठे। गर्मी के तेवर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अनशन पर बैठने वाले अधिवक्ताओं के लिए पूरा दिन धरना स्थल पर निकालना भारी पड़ता है। अनशन पर बैठे अधिवक्ताओं की साथी हौसला अफजाई करते रहते हैं। पूरा दिन एडीजे कोर्ट को मकराना में लाने की रूपरेखा बनाने में निकलता है। एडवोकेट दिलीप सिंह राठौड़, बलजीत सिंह किरड़ोलिया, श्रीनिवास वैष्णव व सिकंदर खान ने बताया कि संघ की सरकार से वार्ता चल रही है। मकराना में एडीजे कोर्ट खोलने की प्राथमिकताओं को लेकर पूरे तथ्यों से अवगत कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री के 3 मई को मकराना दौरे के समय भी प्रतिनिधि मंडल ने सीएम से औपचारिक भेंट कर एडीजे कोर्ट मकराना में खुलवाने की मांग की थी।