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जिले में 32 एंबुलेंस, अतिरिक्त एंबुलेंस एक भी नहीं, दुर्घटनास्थल पर समय पर नहीं पहुंच पाती

3 वर्ष पहले
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सवाई माधोपुर जिले में वर्तमान समय में कहने को तो 32 एंबुलेंस संचालित है, लेकिन इन 32 एंबुलेंस में से एक एंबुलेंस भी यदि खराब हो जाती है तो खराब एंबुलेंस के स्थान पर दूसरी एंबुलेंस भेजने के लिए एक भी अतिरिक्त एंबुलेंस नहीं है। जिले में संचालित एंबुलेंस की स्थिति सोचनीय है, आए दिन एक न एक एंबुलेंस खराब होती रहती है, जिसकी पूर्ति समीप के अस्पताल या पुलिस स्टेशन से एंबुलेंस बुलाकर व्यवस्था को बनाया जाता है। इस प्रकार व्यवस्था से कभी अनहोनी की घटना घटित हो सकती है।

यह है जिले की स्थिति

जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में 32 एंबुलेंस संचालित है, जिनके संचालन की जिम्मेदारी जीवीकेईएमआरआई कंपनी को दी गई है। इन एंबुलेंस में सवाई माधोपुर ब्लॉक में मानटाउन थाने में 108, कोतवाली थाने में 108, सूरवाल में बेस एंबुलेंस, कुस्तला में 108, शिवाड़ 108 व 104, कुंडेरा अस्पताल में 104 व 108, गंगापुर सिटी ब्लॉक में गंगापुर में 108, वजीरपुर अस्पताल में 108 व 104, बौंली ब्लॉक में बौंली में 108 व 104, मलारना चौड़ में 104 व 108, मलारना डूंगर में 108, खिरनी में 104 व 108, भाड़ौती में 104, बामनवास ब्लॉक में 108 व 104, लिवाली में 104 बरनाला में 104, बाटोदा में बेस एंबुलेंस, खंडार ब्लॉक में खंडार में 108, बालेर में 108 व 104, बहरावंडा खुर्द 104 व 108 फलौदी में 104 बरवाड़ा में 104 व 108 एंबुलेंस है।

कॉल जयपुर पहले जाती है

यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना होने पर 108 पर कॉल करता है तो यह कॉल सीधे जयपुर मुख्यालय को जाती है। वहां से एंबुलेंस के जिला नियंत्रण कार्यालय को भेजी जाती है। जिला नियंत्रण कार्यालय समीपवर्ती एंबुलेंसकर्मी को कॉल भेजता है। यदि इस बीच एंबुलेंस खराब है या फिर किसी मरीज को लेकर सवाई माधोपुर रैफर के लिए एंबुलेंस को भेज दिया जाता है, तो कॉल बाद में अन्य अस्पतालों के एंबुलेंसकर्मी को भेजी जाती है, चाहे वह दुर्घटना स्थल से 40 किमी दूरी ही क्यों ना हो। ऐसी स्थिति में यदि दुर्घटनास्थल पर मरीज की हालत गंभीर हो तो एंबुलेंस के 40 किमी दूर से आने तक मरीज की जान को खतरा हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि बहरावंडा खुर्द की एंबुलेंस सवाई माधोपुर रैफर है तो खंडार की एबुंलेंस को भेजा जाता है और यदि खंडार की एंबुलेंस खराब हो तो 40 किमी दूर बालेर से भी एंबुलेंस मंगवा ली जाती है। दूर से एंबुलेंस आने की वजह से दुर्घटना होने पर मरीज की जाने का खतरा होता है।

पैनल्टी लगाकर कर लेते हैं इतिश्री

जानकारी के अनुसार यदि समय पर एंबुलेंस दुर्घटनास्थल पर नहीं पहुंचती है तो चिकित्सा विभाग द्वारा एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जीवीकेईएमआरआई पर पैनल्टी लगाई जाती है। विभाग तो समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर पैनल्टी लगाकर इतिश्री कर लेता है। वहीं समय पर ईलाज नहीं मिलने पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को इसका खामियाजा अपनी जान देकर देना पड़ सकता है।

समय पर नहीं सुधरती एंबुलेंस

एंबुलेंस के संचालन के साथ-साथ रखरखाव की जिम्मेदारी भी जीवीकेईएमआरआई कंपनी को ही दी गई। इन एंबुलेंस में आए दिन खराबी आती रहती है। एंबुलेंस की स्थिति को देखा जाए तो खराब टायरों की समस्या अधिकांश एंबुलेंस में है। इन खराब टायरों की वजह से चालक भी एंबुलेंस को चलाने से कतराते है। यदि कोई दुर्घटना हो जाती है तो आपातकाल में एंबुलेंस को तीव्र गति से चलाने पर दुर्घटना भी घटित हो सकती है। वहीं यदि आपातकाल में तेज गति से एंबुलेंस को चालक के द्वारा नहीं चलाया जाता है तो मरीज की जान जाने का भी खतरा रहता है। खराब होने के बाद कई-कई दिनों तक इन एंबुलेंस को ठीक नहीं करवाया जाता है।

देरी पर लगती है पेनल्टी

एंबुलेंस के संचालन एवं उनके रखरखाव की जिम्मेदारी जीवीकेईएमआरआई कंपनी को दी गई है। दुर्घटनस्थल पर समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर कंपनी पर पैनल्टी लगाई जाती है। डॉ. टीकाराम मीना, सीएमएचओ

जिले में वर्तमान में सवाई माधोपुर, खंडार, बौंली, बामनवास और गंगापुर सिटी में 32 एंबुलेंस संचालित है। सवाई माधोपुर में ही नहीं पूरे राजस्थान में कहीं भी कोई अतिरिक्त एंबुलेंस नहीं है, जिसे खराब हुई एंबुलेंस के स्थान पर भेज सके। किसी एंबुलेंस के खराब होने की स्थिति में उसके नजदीकी लोकेशन एंबुलेंस को भेजा जाता है। एंबुलेंस के खराब होने की स्थिति में वर्कशॉप में ठीक करवाने के दौरान समय अधिक लग जाता है। अभिषेक पाठक, जिला प्रबंधक 108 व 104 सवाई माधोपुर

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