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25 लाख रुपए से तैयार ममदोट का खेल स्टेडियम बना खंडहर

3 वर्ष पहले
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खेलों को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए कई स्टेडियम की हालत खस्ता हो चुकी है। आज इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। ममदोट में खेल स्टेडियम का निर्माण करीब 13 वर्ष पूर्व हुआ था जो आज खंडहर में तबदील हो चुका है। शहीदों की धरती फिरोजपुर की बात करें तो अब तक हाॅकी को ओलंपियन हरमीक सिंह (सेवा मुक्त चीफ प्रशिक्षक एनआईएस और एरिया टीम के कप्तान), ओलंपियन अजीत सिंह, ओलंपियन गगन अजीत सिंह, गुरबाज सिंह और कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। जिन्होंने देशों विदेशों में अपना नाम बनाया और सरहदी जिले का भी नाम रोशन किया। परन्तु यदि ताजा हालात देखें तो सरहदी जिले में इन दिनों सरकारी स्टेडियम का बुरा हाल है। जिस कारण पिछले लंबे समय से कोई भी खिलाड़ी फिरोजपुर से ओलंपियन नहीं बन सका। कई स्टेडियमों में प्रशिक्षकों की कमी और कहीं समान टूटा पड़ा है और तो ओर समय-समय की सरकारें भी इन बारे कुछ भी सोच नहीं रहीं। सरहदी कस्बा ममदोट की करीब डेढ़ लाख आबादी वाले क्षेत्र में बनाए गए खेल स्टेडियम की हालत खराब है।

टूट चुके हैं कमरों के दरवाजे और शीशे

भास्कर के साथ बातचीत करते ममदोट निवासी संदीप कुमार, हरजीत सिंह, मनजीत सिंह, हरनेक सिंह आदि ने बताया कि राज्य की सत्ता में आने वाली हरेक पार्टी हमेशा खेल को बढ़ावा देने व विकास करने के वादे करती है। लेकिन अब यह खेल स्टेडियम नशेड़ियों का अड्डा बना पड़ा है। स्टेडियम की चारदीवारी न होने के कारण कूड़े के साथ स्टेडियम भरा पड़ा है। स्टेडियम की हरेक चीज़ खस्ता हालात में है। कमरों के दरवाजे टूटे हुए हैं और खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हैं। यहां तक की स्टेडियम में बने बाथरूम की हालत पूरी तरह खस्ता बनी हुई है। ममदोट निवासियों ने दावा करते बताया कि शाम ढलते 20 साल से ले कर 25 साल तक के नौजवान लड़के यहां आ कर नशे आदि करते हैं।

ममदोट में स्थित खेल स्टेडियम की दयनीय हालत की फोटो (दाएं) टूटे हुए दरवाजे

स्टेडियम बनने में लगे 4-5 साल, उसके बाद न पहुंचा खेल का सामान और न ही प्रशिक्षक

2004 -2005 में बनाए गए इस स्टेडियम पर कुल खर्च 25 लाख रुपए आया था। उस समय के फिरोजपुर देहाती हलके के विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढी की तरफ से उक्त स्टेडियम का नींव पत्थर रखा गया था। करीब 4-5 वर्ष के दौरान बनकर तैयार हुए स्टेडियम के बाद न तो वहां कोई प्रशिक्षक पहुंचा और न ही खिलाड़ियों के लिए कोई समान। 2008 में कबड्डी के कुछ खिलाड़ियों के की तरफ से अपना कोचिंग सेंटर उक्त स्टेडियम में खोला गया, जिनको प्रशासन के की तरफ से कुछ महीनों बाद उठा दिया गया। ताजा हालत पर नजर डाली जाए तो स्टेडियम बिल्कुल खंडहर बना पड़ा है।

विभाग की तरह से अगर राशि जारी होती है तो सुधारेंगे स्टेडियम : सुच्चा सिंह

इस मामले को लेकर जिला खेल अफसर बलवंत सिंह कहा कि वे स्टेडियम की हालात को सुधारने के लिए सरकार और संबंधित नगर पंचायत ममदोट को लिखेंगे। दूसरी तरफ जब नगर पंचायत ममदोट के कर्मचारी सुच्चा सिंह के साथ बातचीत की गई तो उन्हों ने पल्ला झाड़ते कहा कि इस की उसारी नगर पंचायत बनने से पहले की हुई है। इस का हमारे पास कोई रिकार्ड नहीं है। सुच्चा सिंह ने कहा कि यदि संबंधित विभाग की तरफ से हमें कोई राशि जारी हो जाती है तो पहल के आधार पर स्टेडियम का सुधार किया जाएगा।

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