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बच्चों की किताबें शिक्षा विभाग ने गोडाउन में रख दीं, एक साल में दीमक ने कर दी चट
शासन की योजनाओं को किस तरह विफल किया जा रहा है। इसका उदाहरण मनासा विकासखंड में शिक्षा विभाग में देखने को मिला। शासन ने बच्चों को नि:शुल्क किताबें बांटने के लिए भेजी। अधिकारियों ने इन्हें एक कमरे में रखकर ताला जड़ दिया। एक वर्ष में इन किताबों के सेट को दीमक चट कर गई। अब अधिकारी एक दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं।
विकासखंड के 137 मिडिल व 206 माध्यमिक विद्यालय के करीब 34 हजार बच्चों को पिछले शिक्षा सत्र में नि:शुल्क पुस्तकें बांटने के लिए भेजी गई थी। पुराने सिविल अस्पताल के गोडाउन में इन किताबों को रखा। समय पर बच्चों को किताबेंं नहीं बांटी। इसके कारण इन किताबों के सेट गोदाम में दीमक के कारण खराब हो गई। गोदाम में पानी के कारण भी किताबे गल गई। बीअारसी इसे अब अाउट अाॅफ काेर्स किताबाें का स्टाॅक बता रहे हैं। मामले का खुलासा हाेने पर विभाग किताबें निचली कक्षाअाें अाैर साक्षरता मिशन में देने की बात कर रहा है। इन किताबाें पर प्रिंट वर्ष 2017 अंकित है। पिछले वर्ष कक्षा 9वीं से 12वीं तक का कोर्स बदला गया था। जबकि पहली से 8वीं तक के कोर्स में दो वर्ष से बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में इन किताबों को अधिकारियों ने बच्चों को क्यों नहीं बांटी इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सरकार द्वारा बच्चाें के बस्ते का बाेझ कम करने उद्देश्य से शिक्षण व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत मनासा, जावद अाैर नीमच विकासखंड में मिडिल तक के छात्राें काे जाॅय फूल लर्निंग कार्ड से पढ़ाया जाता था। दाे वर्ष पहले इसे बंद कर वापिस किताबाें से पढ़ाया जाने लगा। एबीसी (एक्टीविटी बेस लर्निंग) काेर्स बंद हाेने से बची हुर्इ किताबाें का पिछले पांच का स्टाॅक रखा हुअा है जिसमें पिछले शिक्षण सत्र की किताबाें के भी ढेराें को दीमक चट कर गई।
पुराने सिविल अस्पताल के गोडाउन में एेसे दीमक चट रही किताबों काे, दूसरे चित्र में कबाड़ में धूल फांक रही किताबें।
स्टाॅक की किताबें बांटी जाएंगी
बीअारसी बी एल बसेर ने बताया गोडाउन मेंें रखी ज्यादातर किताबें अाउट अाॅफ काेर्स हैं। इनको स्कूलाें की लाइब्रेरी भिजवाएंगे ताकि छाेटी कक्षाअाें के विद्यार्थी पढ़ सके अाैर साक्षरता मिशन में काम अा सके। दाे साल पहले एबीसी काेर्स बंद हाेने से किताबाें का स्टाॅक रखा हुअा है। चालू शिक्षण सत्र की किताबें नहीं मिली है, उनके साथ ही स्टाॅक में रखी किताबें भी स्कूलाें काे भेज दी जाएंगी। मांग पत्र से दस प्रतिशत अतिरिक्त किताबें पुस्तक निगम द्वारा भेजी जाती है, ताकि बच्चाें की संख्या बढ़ने पर किताबें कम न पड़े।