दूरसंचार विभाग में ठेकेदार के साथ काम करने वाले धनराज को पांच महीने से माकूल इलाज नहीं मिल रहा। धनराज सहित प|ी इंद्रादेवी, पुत्री व बेटों के समक्ष अब तो खाने-पीने का भी संकट है। डॉक्टरों ने इलाज के लिए तीन लाख रुपए का खर्च बताया है। यह परिवार मदद की गुहार लगाते हुए अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने को मजबूर है।
धनराज की मजदूरी से ही पांच लोगों के परिवार का खर्च चलता था। बड़ी बेटी संजू रूपीदेवी कॉलेज में प्रथम वर्ष में पढ़ती है। पुत्र सोनू 10वीं व अंकित 5वीं के सरकारी स्कूलों में है। धनराज बलाई 11 जनवरी को भीलवाड़ा रोड पर स्थित एक प्रोसेस के टेलीफोन में तकनीकी खराबी आने पर लाइन चेक कर रहा था।
इस दौरान छत से गिर गया। सिर, पैर व पसलियों में गंभीर चोटें आई। उसे एमजी अस्पताल ले गए जहां से रैफर कर दिया गया। ठेकेदार के कर्मचारियों ने उसे रामस्नेही अस्पताल में भर्ती तो करा दिया लेकिन बाद में किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिजनों के पास पैसा था तब तक वहीं रखा। दो महीने तक इलाज चला लेकिन तबीयत में सुधार नहीं आया। आर्थिक तंगी भी आ गई। तब उसे घर पर लाना पड़ा। अब घर पर ही सेवा की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि अहमदाबाद या जयपुर लेना चाहिए ताकि अच्छा इलाज हो सके। इसके लिए लगभग तीन लाख रुपए खर्च बताया गया।
धनाभाव में घर लाने के बाद धनराज की कुछ यूं सार संभाल करते परिजन।
न्याय आपके द्वार शिविर में जांच के लिए लिखा पर नहीं हुई कार्रवाई ... मेजा में 7 मई को न्याय आपके द्वार शिविर के दौरान धनराज की प|ी ने शिविर प्रभारी से मदद की गुहार लगाई थी। उपखंड अधिकारी सीएल शर्मा ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर धनराज की मदद करने और मामले की रिपोर्ट पेश करने की कहा था। 13 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, दूरसंचार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि धनराज ठेकेदार के अधीन था। विभागीय स्तर पर मदद नहीं कर सकते।