बिजोलिया | भोपतपुरा में भागवत कथा के आखिरी दिन पं. शिवलहरी गौतम ने कहा कि परमात्मा को छोड़कर ऐसा अन्य नहीं है जो अपना सर्वस्व किसी को दे। यदि सेवा करनी है तो भगवान की करो। ज्ञान का फल धन और प्रतिष्ठा से नहीं है। परमात्मा के मिलन से है। विद्या का उपयोग केवल अर्थोपार्जन के लिए करना ठीक नहीं हैं। सुदामा अपनी विद्या का उपयोग भोग के लिए नहीं बल्कि भगवान के लिए करते थे। समापन समारोह में जिला प्रमुख शक्तिसिंह हाड़ा, पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय, भाजयुमो प्रदेश मंत्री संजय धाकड़, किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष कैलाश धाकड़ सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।