सितंबर 1988 में कर्नाटक में जनता पार्टी व लोक दल ने मिलकर जनता दल बनाई और सरकार बनाने का दावा किया। जनता दल ने एसआर बोम्मई के नेतृत्व में सरकार बनाई। दो दिन बाद जनता दल के ही विधायक केआर मोलाकेरी ने बोम्मई के खिलाफ राज्यपाल पी वेंकटसुबैया को अर्जी दी। साथ में 19 विधायकों की सहमति-पत्र भी था। इन 19 विधायकों ने सहमति पत्र में जाली हस्ताक्षर होना बताया और मामला कोर्ट पहुंचा। 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत का फैसला विधानमंडल में किए जाने के आदेश दिए। ताजा मामला भी वैसा ही रहा।