मांडलगढ़ | शरीर को क्रियाशील बनाए रखने के लिए इसकी सफाई व शोधन की आवश्यकता है। शरीर रूपी यंत्र का बाहरी शोधन स्नान से हो जाता है, लेकिन शोधन के लिए हमें अनेक प्रकार की यौगिक क्रियाएं करनी पड़ती हैं। यह बात योगाचार्य उमाशंकर शर्मा ने नेती क्रिया को समझाते हुए कही। उन्होंने कहा कि नेती क्रिया को मुख्य रूप से श्वसन संस्थानों के अवयवों की सफाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इसे करने से प्राणायाम करने में भी आसानी होती है। योगाचार्य शर्मा ने कहा कि नासिका हमारे शरीर का मुख्य प्राण मार्ग है। इसलिए हमें शुद्ध प्राणवायु लेने के लिए इस नासिका रूपी मार्ग का शोधन करना जरूरी है।