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सामूहिक विवाह सम्मेलनों से समाप्त कर रहे दहेज प्रथा

3 वर्ष पहले
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ब्लाक में आज अक्षय तृतीया पर साहू, सर्वब्राह्मण, पाल, गवली यादव एवं धाकड़ नागर समेत कई समाजों के सामूहिक आदर्श विवाह सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा सम्मेलन धाकड़ समाज का होगा। यह समाज अन्य समाजों के लिए आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। समाज ने न सिर्फ दहेज जैसी कुप्रथा पर सफलता पाई बल्कि सामाजिक आर्थिक भेद अमीरी गरीबी को भी मिटाया। इतना ही नहीं समाज शादी में होने वाले मितव्यय फिजूलखर्ची पर भी रोक लगाने का संदेश दे रहा है।

समाज की सुपर कमेटी अध्यक्ष कालूराम नागर बताते हैं कि समाजजनों ने सामूहिक विवाह सम्मेलन की शुरुआत 33वर्ष पहले 1986 में की थी। ताकि समाज में दहेज प्रथा बंद की जा सके। इस बदलाव का असर हुआ। पहले तो सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर जोड़े ही इस सम्मेलन में शामिल होते थे, लेकिन धीरे धीरे जागरूकता बढ़ती गई। अब क्षेत्र में समाज के एक दर्जन से अधिक गांवों के अमीर गरीब हर तबका अपने बेटे बेटियों की शादी अक्षय तृतीया पर औबेदुल्लागंज में होने वाले इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में धूमधाम से करते हैं। इस तरह समाज में बीते 33 सालों से दहेज प्रथा पूरी तरह बंद हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया पर 43 जोड़े विवाह बंधन में बंधेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि समाज में एकता बढ़ने के साथ आर्थिक संपन्नता भी आई है। समिति के सचिव कंचन नागर का कहना है कि पहले समाज के लोगों को अपनी बेटे बेटियों की शादी करने के लिए जमीन बेचनी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। दहेज लेनदेन पर रोक लगने से अब समाज के लोग दहेज के बचे पैसों से बच्चों की पढ़ाई और उन्नत खेती में खर्च कर रहे हैं।

अब नहीं रहती दहेज की चिंता

नगर के वार्ड 15 सतलापुर निवासी हरनाम सिंह धाकड़ ने बताया कि समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन होने से अब उन्हें बेटी पूजा की शादी के दहेज की चिंता नहीं रही। इस साल पूजा ग्रेजुएशन कर चुकी है। अगले साल अक्षय तृतीया पर समाज के सम्मेलन में उसकी शादी कर दूंगा।

अब नहीं समझते बेटियों को बोझ

पाल समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक पाल बताते हैं कि सामूहिक विवाह कराने का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि समाज में बेटियां को अब बोझ नहीं समझा जाता। बेटियों को बोझ समझने का सबसे बड़ा कारण इनकी शादी में दिया जाने वाला दहेज ही था। इसके चलते समाज की सोच में बदलाव तो आया ही है समाज ने अब इस कुप्रथा से पूरी तरह पार पा लिया है।

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