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किसान ज्यादा मुनाफे की चाह में अब रबी ही नहीं खरीफ सीजन में भी कर रहे हैं प्याज की खेती

3 वर्ष पहले
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ब्लाक में 250 एकड़ में रोपी जा रही प्याज

मंडीदीप| ब्लाक के किसान एक ओर जहां खरीफ सीजन में धान और रबी में गेहूं की उन्नत किस्मों का उपयोग कर बंपर उत्पादन कर लाभ कमा रहे हैं। वहीं अब वे प्याज की भी अधिक से अधिक फसल लेने की तैयारी में जुट गए गए हैं। इसी के अंतर्गत क्षेत्र में आने वाले खरीफ सीजन में करीब 250एकड़ में वैज्ञानिक तरीके से प्याज उगाने की तैयारी की जजा रही है। इस काम में सरकार भी उनकी सहायक बनेगी।

मालूम है कि बीते वर्ष सरकार ने किसानों को बिचौलियों के हाथों लुटने से बचाने के साथ ही साथ अधिक मुनाफा देने जहां सीधे किसानों से 8 रु प्रति किग्रा मी दर से प्याज की खरीदी की थी। वहीं इस साल सरकार बड़े पैमाने पर प्याज की खरीदारी व भंडारण करेगी। इसके लिए सरकार ने 200 करोड़ के फंड की अलग से व्यवस्था की है। इसे देखते हुए उत्साहित किसानों ने इस साल से खरीफ सीजन में भी प्याज की रोपाई करने की तैयारी कर रहे हैं। जबकि अब तक सिर्फ रबी सीजन में ही प्याज की रोपाई होती थी। इस तरह दोनों सीजन में प्याज की रोपाई कर किसान अच्छे दाम ले सकेंगे। लेकिन ब्लाक में भंडारण की सुविधा न होने से वे मुनाफा नहीं कमा पाते थे।मगर अब सरकार इसकी भी चिंता कर रही है। सरकार प्याज खराब न हो इसके लिए सरकार किसानों को भंडारण की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी।

क्षेत्र के किसानों ने उन्नत किस्म के बीज से नर्सरी तैयार कर प्याज की रोपाई करेंगे। किसान अच्छी पैदावार के लिए नासिक रेड व एन-53 बीज की बुआई करेगे। कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए 50फीसदी पैसा देगी सरकार कृषि विकास अधिकारी डीएस भदौरिया बताते हैं कि उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने प्रदेश प्रदेश सरकार द्वारा क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज चेन का निर्माण कराने की योजना है। इसके लिए सरकार 50 प्रतिशत अनुदान देगी। इसमें 35 फीसदी केंद्र और 15 फीसदी राज्य सरकार का होगा। ताकि किसानों को आर्थिक रुप से समृद्ध बनाया जा सके।

नई फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी के तहत प्रदेश में फल, फूल और अन्य उद्यानिकी फसलों के बढ़ते उत्पादन और जरूरत को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिया गया है। उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मप्र में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता 9.47लाख मीट्रिक टन है। जबकि 18.18 लाख मीट्रिक टन की जरूरत है। सरकार ने तय किया है कि फूड प्रोसेसिंग की नई नीति में प्रदेश में अगले दो साल में 5 लाख मीट्रिक टन क्षमता की वृद्वि की जाएगी।

इसकी क्षमता बढ़ने से कोल्ड चेन के जरिए प्रदेश के आलू, टमाटर, पपीता, केला एवं संतरा आदि को देश के किसी भी कोने में भेजने में आसानी तो होगी ही इससे किसानों को भी अच्छा मुनाफा मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में फल सब्जी आदि के कलेक्शन सेंटर भी बनाने की योजना है। इसके लिए भी 50 प्रतिशत या अधिकतम एक करोड़ की सहायता दी जाएगी।

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