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28 प्रकार की निशुल्क जांच का दावा पर 18 का ही मिल रहा लाभ

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार सीएचसी लेबल के स्वास्थ्य केंद्र में 28 प्रकार की नि:शुल्क जांच सुविधाएं देने का दावा करती है। मगर सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हालात ये है कि तय 28 जांचों में से पीलिया और मलेरिया जैसी सामान्य बीमारी तक की जांच सुविधा नहीं मिल पा रही है। आश्चर्य की बात ये है कि एक ओर जहां गंभीर रोगों से पीड़ित मरीज जांच कराने के लिए अस्पताल के चक्कर काट परेशान हो रहे हैं। वहीं दूसरी और केंद्र प्रभारी को ये भी पता नहीं कि कितनी जांच किन कारणों से नहीं हो पा रहीं हैं। ऐसे में सहज समझा जा सकता है कि बंद पड़ी जांच सुविधा को पुन: प्रारंभ कराने के लिए उन्होंने क्या और कितने प्रयास किए होंगे। जिम्मेदारों की इस लापरवाही का खामियाजा गरीब वर्ग के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई परवाह नहीं है।

शनिवार को सतलापुर निवासी दिनेश मेहरा इलाज के लिए सरकारी अस्पताल गया। डॉक्टर ने उसे पीलिया की जांच कराने को कहा। दिनेश ने पैथोलॉजी लैब में जांच के लिए कहा तो उसे किट न होने का हवाला देकर जांच करने से मना कर दिया गया। इसी तरह राहुल नगर निवासी कृष्णाबाई मलेरिया की जांच कराने आईं थीं, लेकिन लैब टेक्नीशियन को चिकनपॉक्स होने से उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ा। ऐसे हालात यहां प्रतिदिन देखने को मिल रहे हैं। लंबे समय से यहां स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी चल रहीं हैं। जिससे मरीजों को उचित उपचार के साथ नि:शुल्क जांच सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जबकि नगर में इन दिनों पीलिया के मरीजों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसका कारण दूषित पानी की सप्लाई होना बताई जा रही है।

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