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21 को विशेष सम्मेलन के बाद होगा नपा सभापतियों के विभागों का फैसला, बावजूद विवाद थमने के आसार नहीं

3 वर्ष पहले
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नगरपालिका सभापतियों के विभागों को लेकर मामला उलझता जा रहा है। संगठन स्तर पर सभी के विभागों के बदलाव को लेकर निर्णय तो हो गया लेकिन अब तक घोषणा नहीं की है। सूत्रों के अनुसार नपा परिषद ने सोमवार को शिवना शुद्धिकरण अभियान को लेकर विशेष सम्मेलन बुलाया है। इसकी वजह से विभागों की घोषणा नहीं की। संगठन सोमवार को ही परिषद की बैठक के बाद या मंगलवार को सभापतियों के विभागों की घोषण कर देगा। इधर जिन सभापतियों से वापस पद लिए वे अब पार्टी के ही सभापतियों की कमजोरियां तलाशने व विरोध के लिए तथ्य एकत्र करने में जुट गए हैं।

भाजपा संगठन द्वारा अप्रैल में किए सभापतियों के बदलाव से उपजे विवाद को शांत करने के लिए आखिरकार संगठन ने 5 मई को सभी बदलावों को स्थगित करते हुए, नपा चुनाव के बाद तय किए सभी सभापतियों को वापस जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद पार्षद खुलकर तो विरोध नहीं जता रहे लेकिन संगठन में अंदर ही अंदर घमासान जारी है। संगठन मामले को शांत करने के लिए अपने निर्णय को भी रोककर बैठा है। सूत्रों के अनुसार तो संगठन स्तर पर सभी सभापतियों के विभागों पर मुहर लग चुकी है। इधर, नपा ने 21 मई को सुबह 11 बजे नपा सभागृह में परिषद का विशेष सम्मेलन बुलाया है। इसमें सभापतियों का विरोध ना हो इसके लिए संगठन ने अब तक अपने निर्णय की घोषणा नहीं की है। सोमवार को परिषद की बैठक के बाद या मंगलवार सुबह संगठन सभापतियों को विभागों की जिम्मेदारी तय कर देगा। इसमें लोक निर्माण विभाग, राजस्व व गरीबी उन्मूलन विभाग की जिम्मेदारियां बदली जाएंगी। बाकी सभापति यथावत रहेंगे।

घमासान जारी

वे पार्षद जिनसे सभापति पद वापस लिए वे अब मौजूदा सभापतियों की कमजोरियां तलाशने व तथ्य एकत्र करने में जुटे

सभापतियों के खिलाफ खड़े हो रहे पार्षद

सूत्रों के अनुसार 15 दिन सभापति रहे दीपिका जोशी, विद्या दशौरा, राम कोटवानी व निरांत बग्गा ने अंदर ही अंदर वर्तमान सभापतियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कुछ पार्षद सभापतियों की कमजोरियां तलाशने का काम करते हुए उनके खिलाफ लोगों के माध्यम से विरोध करा रहे हैं। कुछ पार्षद नपा कार्यालय में विभागों के कर्मचारियों पर सभापतियों के खिलाफ जानकारी देने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि इसकी जानकारी देने से सभी इनकार कर रहे हैं।

पार्षदों द्वारा सभापतियों के विरोध जैसी बात नहीं, मिलकर काम करेंगे

सभापतियों के विभाग के मामले में संगठन स्तर पर चर्चा चल रही है। अभी हम 21 मई को नपा सभागृह में होने वाले विशेष परिषद सम्मेलन की तैयारी में लगे हैं। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा कर जल्द उचित निर्णय लेंगे। पार्षदों द्वारा सभापतियों के विरोध जैसी कोई बात नहीं है। कुछ नाराजगी हो सकती है। सभी एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। आगे भी करते रहेंगे। प्रहलाद बंधवार, नपाध्यक्ष

विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में पार्टी पर भारी पड़ सकती है गुटबाजी

नपा सभापतियों के विवाद के बाद भाजपा में भी गुटबाजी दिखाई देने लगी है। जनप्रतिनिधियों के गुट में अलग-अलग पार्षदों ने स्थान बना रखा जो अपने पार्षद को पद दिलाने की होड़ में लगे हैं। पद व विभाग नहीं मिलने पर पार्षद भी खुल कर पार्टी व संगठन के निर्णय का विरोध कर चुके हैं। अभी भी पार्षद एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने के प्रयास में लगे हैं। पार्टी संगठन ने जल्द ध्यान नहीं दिया तो गुटबाजी विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव में भाजपा पर भारी पड़ सकती है। चुनाव में गुट एक-दूसरे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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