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जिला सहकारी बैंक के 58 हजार किसानों पर 1.02 अरब रु. का कर्जा

3 वर्ष पहले
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चुनावी साल में किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। इन सबके बीच प्रदेश सरकार किसानों को फसलों के सही दाम देने के मकसद से भावांतर-समर्थन मूल्य, सब्सिडी जैसी योजनाएं चला रही है तो विपक्षी दल कांग्रेस के बाद ‘आप’ ने भी कर्ज माफी का मुद्दा उठाया है। ताजा स्थिति में मंदसौर-नीमच जिले के 58 हजार किसानों पर 1 अरब 2 करोड़ 53 लाख रुपए तक का कर्जा है, जो सहकारी बैंक के खाताधारक हैं। इन किसानों पर 2 से 10 साल तक का कर्ज बकाया है।

नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव है। किसानों को हर साल शून्य फीसदी ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने वाली जिला सहकारी बैंक के ऋणी किसानों की संख्या वर्तमान में 58, 606 हैं। 102 करोड़ 53 लाख का कर्जा है। पिछले दिनों कांग्रेस ने किसान स्वाभिमान यात्रा के दाैरान कर्जमाफी की मांग उठाई थी, पिपलियामंडी में ‘आप’ की सभा में भी राष्ट्रीय नेताओंं ने इसी बात को दोहराया, कर्ज माफी करने वाले कुछ राज्यों के उदाहरण भी दिए।

भाजपा : साबित कर दिया खेती घाटे का सौदा नहीं
प्रदेश में भाजपा ने किसानों की सुध ली है और कल्याणकारी योजनाएं चलाई। समर्थन मूल्य, भावांतर, जीरो फीसदी ब्याज पर पर सब्सिडी आदि। जहां तक कर्जे की बात है तो किसानों को राहत देने के लिए 15 जून तक मूल राशि का 50 फीसदी जमा कराने की योजना चलाई है। समझौता योजना में जिले के 17300 किसानों को गेहूं पर 24 करोड़ की बोनस राशि शीघ्र मिलने वाली है। भाजपा सरकार किसान के परिश्रम का मूल्य जानती है । मदनलाल राठौर, अध्यक्ष-जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, मंदसौर

कांग्रेस : वादा नहीं निभा सके

2014 से पहले नरेंद्र मोदी खुद कहते थे फसलों के जो दाम हैं वह पर्याप्त नहीं, लागत का डेढ़ गुना तक मिलना चाहिए। उनके पीएम बनने के बाद तो भाव और भी आधे हो गए। किसान फसलों के सही दाम चाहता है ताकि बिजली, बच्चों की फीस, घर खर्च जैसी पूर्ति हो सके। नीरव मोदी, माल्या जैसे लोग हजारों करोड़ लेकर देश से चले जाते हैं। मोदी सरकार अच्छे दाम का वादा नहीं निभा पाई। कर्ज माफी होना चाहिए। नवकृष्ण पाटिल, पूर्व विधायक-कांग्रेस, मंदसौर

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