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सीख... मोबाइल ने हमारे संस्कार छीन लिए

3 वर्ष पहले
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मंदसौर | सामाजिक कार्यकर्ता कमल कोठारी ने कहा कि वाट्सएप, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया से जितनी हमारी ज़िंदगी आसान हुई है उतनी ही पेचीदा एवं संजीदगीभरी भी हो गई है। इंटरनेट, वाट्सएप, फेसबुक की सुविधा से हमने आसमान की ऊंचाई को नापने तक का काम तो अवश्य कर लिया लेकिन समाज व परिवार की आपसी मिलनसारिता, बातचीत को वाट्सएप, फेसबुक के सीमित दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है। मोबाइल संस्कृति ने हमसे हमारे संस्कार छीन लिए, सिर्फ खबरों का आदान-प्रदान करने की औपचारिकता का साधन भर मात्र है।

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