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7 में से 4 सभापति बदले, विरोध पर भाजपा जिलाध्यक्ष धाकड़ बोले- हर विधायक को नहीं बना सकते मंत्री

3 वर्ष पहले
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नपा चुनाव के ढाई साल बाद सभापतियों के बदलाव की प्रक्रिया हुई। चार नए चेहरों को शामिल किया तो एक के विभाग में बदलाव किया और दो यथावत रखे। संगठन सभी पदों पर बदलाव चाहता था लेकिन सहमति नहीं बनने पर संगठन ने नपाध्यक्ष व भाजपा जिलाध्यक्ष पर फैसला छोड़ा दिया। दोनों के निजी रूप से लिए निर्णयों पर विरोध भी तेज हो गया है। नपाध्यक्ष पर जाति विशेष को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लग रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए बाकी पार्षदों को आगे मौका देने की बात कह रहे हैं।

मंगलवार को सभापतियों के बदलाव में विक्रम भैरवा व पुलकित पटवा के पदों को यथावत रखा है। नपाध्यक्ष के चहेते विनोद डगवार को स्वास्थ्य सभापति की जगह लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जबकि स्वास्थ्य सभापति रहते हुए वे स्वयं स्वच्छता रैली से गायब हो गए थे। भाजपा संगठन व नपा के जिम्मेदारों के आकलन में इस बार मुकेश खिमेसरा, श्रवण रजवानिया, निकिता गौड़ व सुनीता बाहेती जगह कायम रखने सफल नहीं हो सके। सभापति पद से मुक्त करने पर मंगलवार को दिनभर राजनीतिक हलकों में इनकी चर्चा रही। दूसरा पहलू देखें तो कुछ को लगातार अवसर भी मिले हैं। जैसे नवमनोनीत सभापति विद्या दशोरा नपा द्वारा संचालित लॉ कॉलेज ट्रस्ट में मेंबर हैं। इनके पति नपा में स्वच्छता के ब्रांड एम्बेसेडर भी हैं। राम कोटवानी भाजपा में जिला उपाध्यक्ष हैं। नए चेहरों में निरांत बग्गा व दीपिका जैन को भी मौका दिया।

चार माह से थी सुगबुगाहट, बदली केवल आधी टीम- नपा सभापतियों के बदलाव को लेकर लंबे समय से चर्चा तेज थी। चार माह से संगठन में नपा के 24 पार्षदों में से अधिक से अधिक को मौका देने के लिए चर्चा चल रही थी। नपाध्यक्ष कुछ पदों में बदलाव चाहते थे। ऐसे में संगठन ने यह फैसला नपाध्यक्ष व भाजपा जिलाध्यक्ष पर छोड़ दिया। इसका लाभ सीधे-सीधे कुछ पार्षदों को मिला। सूत्रों के अनुसार सुबह से बाइक पर बैठाकर नपाध्यक्ष को घुमाने का लाभ डगवार को मिला तो संगठन के विरोध के बाद भी कोटवानी को भाजपा जिलाध्यक्ष का समर्थन मिलने से पद दिया।

इनको इसलिए मिले पद

योजना व यातायात सभापति बनी दीपिका मल्हारगढ़ विधायक जगदीश देवड़ा व पूर्व मंत्री कैलाश चावला के खेमे की मानी जाती हैं। इसी तरह सूत्रों के अनुसार विद्या दशोरा ने पद नहीं दिए जाने पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया व विधायक यशपालसिंह के गुट से जुड़ी हैं। बग्गा को गुरुचरण बग्गा के भतीजे होने का लाभ मिला तो कोटवानी के नाम पर विरोध के बाद भी भाजपा जिलाध्यक्ष ने सभापति की मुहर लगाई।

निर्णय में पक्षपात

ना जाने क्या सोचकर निर्णय लिए। सभापतियों को बदलना था तो सभी को बदलते। मुझे कोई पद नहीं मिलता तो कोई नाराजगी नहीं थी। इस निर्णय में पक्षपात व जातिवाद साफ नजर आ रहा है। हम भी तो पार्टी से जीतकर आए, मेरी नजर में गलत निर्णय लिया है। गुड्‌डू गढ़वाल, पार्षद, वार्ड 16

ना वरिष्ठता देखी ना कार्यशैली

केवल एक जाति विशेष को खुश करने के लिए निर्णय लिए। कोई वरिष्ठता भी नहीं देखी गई ना कोई कार्यशैली को देखा। अन्य पार्टी से अाए लोगों को पद दे दिए। किस तरह निर्णय लिए यह तो वे ही जानें। कुछ दिन पहले सुनने में आया था कि कुछ ने पद नहीं मिलने पर इस्तीफा देने की धमकी दी थी इस दबाव का भी असर दिखाई दे रहा है। संगठन ने जो भी निर्णय लिया वह समझ से परे लेकिन संगठन का निर्णय है तो मानना ही पड़ेगा। आजाददेवी कोठारी, पार्षद, वार्ड 8

ये हैं नए सभापति

विभाग पूर्व सभापति नए सभापति

लोक निर्माण मुकेश खमेसरा विनोद डगवार

स्वास्थ्य सभापति विनोद डगवार विद्या दशोरा

गरीबी उन्मूलन श्रवण रजवानिया निरांत बग्गा

योजना, यातायात निकिता गौड़ दीपिका जैन

राजस्व सुनीता बाहेती राम कोटवानी

सामान्य प्रशासन विक्रम भैरवा विक्रम भैरवा

जलकार्य व सीवेज पुलकित पटवा पुलकित पटवा

जिन्हें पद नहीं मिला वे थोड़ा तो विरोध करेंगे ही

नपाध्यक्ष के साथ बैठकर निर्णय लिए, जिनसे भी चर्चा करना थी उनसे व्यक्तिगत रूप से चर्चा की है। जिन्हें पद नहीं मिला वे नाराज तो होंगे लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया है। अब सभी विधायकों को तो मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया जा सकता। इसी तरह कुछ को अवसर मिला, बाकी को आगे अवसर दिए जाएंगे। देवीलाल धाकड़, भाजपा जिलाध्यक्ष

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