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मरने के बाद देह आए किसी काम, दो दंपतियों ने की दान की घाेषणा

3 वर्ष पहले
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मंदसौर | नगर के दाे दंपतियों ने देहदान करने का निर्णय लिया है। इसके पीछे उनका मकसद मरने के बाद भी लोगों के काम आना है। हालांकि इस कार्य में एक दंपती के परिजन ने विरोध भी किया लेकिन एक साल की समझाइश के बाद बच्चे भी तैयार हो गए। नगर में करीब 15 साल से देहदान का क्रम जारी है। रोटरी क्लब अध्यक्ष राजेश सिंघवी ने बताया अब तक 105 लोगों ने घोषणा की है। 5 की देह अरविंदो मेडिकल काॅलेज भेजी जा चुकी है।

इस बार घोषणा नगर के समाजसेवी विनोद मेहता उनकी प|ी लता एवं कनक पंचोली व उनकी प|ी इंदू ने की है। मेहता ने बताया आज विज्ञान प्रगति कर रहा है। कई दुर्घटनाओं में शरीर के ऐसे अंग खराब हो जाते हैं, जिन्हें बदलना ही पड़ता है। अंग के अभाव में संबंधित की भी मौत हो जाती है। ऐसे में यदि मरने के बाद भी किसी के काम आ सकें तो यह बड़ा दान होगा। दूसरा बड़ा कारण यह है कि शव के अभाव में हमारे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्लास्टिक के शरीर पर प्रयोग करना पड़ता है। इससे वे कहीं ना कहीं अभाव में ही पढ़ाई पूरी करते हैं। इसे देखते हुए ही देहदान का निर्णय लिया। करीब सालभर बेटे व बहू को समझाने में लगे लेकिन इसके बाद वे भी मान गए।

कनक पंचोली

विनोद मेहता

8 लोगों की बच सकती है जान

पंचोली ने बताया देहदान से विपरीत परिस्थिति में करीब 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है। मरने के बाद भी किसी के काम आ सकें तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं हो सकता। मरने के बाद तो सभी को मिट्‌टी ही होना है।

इंदु पंचोली

लता मेहता

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