मेल मर्जिंग सिस्टम से 30 दिन में होने वाला नामांतरण 3 दिन में हो जाएगा
प्लॉट और जमीन के नामांतरण को आसान करने के लिए शुरू की लोक सेवा गारंटी योजना में 30 दिन में होने वाला नामांतरण अब महज 3 दिन में हो सकेगा। इसके लिए जिले की आठों तहसील दफ्तरों में मेल मर्जिंग सिस्टम डेवलप किया जा रहा है।
एक नया साॅफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसकी मदद से एक बार एंट्री करने पर एक हजार तक नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। नामांतरण का आवेदन अपलोड करने पर ऑटोमेटिक नोटिस, इश्तेहार, पटवारी, आरआई रिपोर्ट की सूचना एक बार में जनरेट हो जाएगी। इससे तहसील दफ्तरों में होने वाले कामों में तेजी जाएगी। लोक सेवा गारंटी योजना के तहत जमीन और प्लॉट के नामांतरण का आवेदन करने पर नामांतरण अविवादित होने पर 30 दिन लग जाते है। तय समय में नामांतरण नहीं करने पर संबंधित तहसीलदार पर रोज के हिसाब से जुर्माना लगाया जाता है। इस सॉफ्टवेयर के लागू होने से एक महीने में होने वाला काम तीन दिन में हो जाएगा। इसमें नामांतरण विवादित होने पर केस की सुनवाई की जाएगी। इस व्यवस्था से नामांतरण, बंटवारा, डायवर्सन वसूली, बैंक वसूली, अतिक्रमण सहित अन्य मामलों में आसानी होगी। मंदसौर जिले में वर्तमान में कुल 8 तहसीलें हैं। इसमें मंदसौर, दलौदा, मल्हारगढ़, गरोठ, भानपुरा, सुवासरा, शामगढ़, सीतामऊ शामिल हैं। इसके अलावा राज्य शासन के निर्णय पर मंदसौर शहर में शहरी तहसील भी जल्द अस्तित्व में आएगी। इस तरह जिले में कुल 9 तहसीलें हो जाएंगी।
अनट्रेंड स्टाफ के लिए भी काम करना होगा आसान- जिले की तहसीलों में ज्यादातर अनट्रेंड स्टाफ है। इसके चलते इन्हें नामांतरण, बंटवारा, फौती नामांतरण, बैंक वसूली नोटिस, अतिक्रमण केस नोटिस सहित अन्य कामों में दिक्कत आती है। ऐसे में अकेले बैंक वसूली के 100 नोटिस जारी करने के लिए क्लर्क को 100 आवेदनों में एंट्री करना पड़ती है। इस व्यवस्था से एक नोटिस जनरेट करने पर इस लिस्ट को एक्सेल शीट में अपलोड करना पड़ेगा, जिससे सभी नोटिस एक बार में जारी हो जाएंगे। ऐसा करने से काम में तेजी आएगी जिससे लोगों को राहत मिलेगी।
ऐसे काम करेगा सिस्टम
माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल पर यह सिस्टम काम करेगा। इसके तहत कम्प्यूटर पर दर्ज की गई एक एंट्री आॅटोमैटिक संबंधित पटवारी, आरआई, तहसीलदार और एसडीएम को ट्रांसफर हो जाएगी। इधर, जिन लोगों को इससे संबंधित नोटिस जारी किए जाने हैं, वह भी आॅटोमैटिक जनरेट हो जाएंगे। फायदा यह होगा कि किसी स्तर पर देरी नहीं रहेगी।