तेलिया तालाब मामले में कलेक्टर न्यायालय में पहली सुनवाई हुई। इसमें पार्षद ने पूर्व कलेक्टर पर गुपचुप कार्रवाई करने का आरोप लगा दिया। लिखित में दिए स्पष्टीकरण में कहा कि उन्होंने क्षेत्र की वैध कॉलोेनियों में निर्माण अनुमति को लेकर दिए जा रहे अलग निर्देशों को एक करने की मांग की थी। कलेक्टर ने इस पत्र की आड़ में अन्य जमीन काे भी बाहर कर दिया। जो विधि संगत नहीं है इसलिए ऐसे आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए।
इधर, तेलिया तालाब बचाव समिति के सदस्यों ने भी आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें जनसामान्य को भी पार्टी बनाने और तालाब काे नष्ट करने के लिए कॉलोनाजरों द्वारा किए भराव को खत्म कर तालाब को पूर्व स्थिति में लाने की मांग की। अगली सुनवाई 25 मई तय की है।
किसान आंदोलन के दौरान छोटा किए तेलिया तालाब मामले में शुक्रवार को कलेक्टर न्यायालय में पहली सुनवाई हुई। मामले में पार्षद विद्या दशोरा ने जवाब प्रस्तुत किया। इसमें बताया कि तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्रकुमार सिंह ने उनके पत्र का दुरुपयोग किया है। प्रकरण को लेकर उन्हें कभी भी सूचना नहीं दी गई और ना ही इस प्रकार के आदेश की कोई सूचना दी गई। हमने केवल वैध कॉलोनियों में कुछ भूस्वामियों को भवन निर्माण के लिए अनुमतियों नहीं मिलने को लेकर पत्र लिखा था। जबकि क्षेत्र में कई लोगों को भवन निर्माण की अनुमति शासन ने ही दी थी। इसे देखते हुए कलेक्टर द्वारा दिए गए आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए।
तेलिया तालाब जनहित का मुद्दा है
इसी मामले में तालाब को जनहित से जुड़ा मामला बताते हुए तेलिया तालाब बचाव समिति ने भी पत्र लिखा। समिति के एडवोकेट कांतिलाल राठौर ने बताया कि तालाब का मुद्दा जनहित का मुद्दा है। तालाब से क्षेत्र का जलस्तर बढ़ता है इसलिए मामले में जन सामान्य को भी पार्टी बनाया जाना चाहिए।
बताएं किसके दबाव में जारी किया आदेश- तोमर
समिति के ही एडवोकेट राघवेंद्र तोमर ने बताया मामला जनहित से जुड़ा है। पार्षद दशोरा डूब क्षेत्र में प्लॉट खरीदने वालों की पैरवी कर रही हैं। तालाब बचाने को लेकर उन्हें डूब क्षेत्र में किसी भी तरह से कॉलोनी डेवलप करने वाले व लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले काॅलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना चाहिए। उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करवाना चाहिए जिन्होंने कॉलोनी निर्माण की अनुमति दी। फिर पार्षद इस बात का खुलासा क्यों नहीं करती कि पूर्व कलेक्टर ने किसके दबाव में यह आदेश जारी किया। जबकि वे जवाब में यह लिख चुकी है कि उन्होंने कलेक्टर को दिए पत्र की प्रतिलिपि विधायक, सांसद व नगरपालिका अध्यक्ष को दी थी। इससे पहले विधायक यशपालसिंह सिसौदिया इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि पार्षद के पत्र पर उन्होंने कवरिंग लेटर लगाकर कलेक्टर को भेजा था। इसका सीधा मतलब है कि तालाब को मिटाने की साजिश भाजपा से जुड़े लोगों ने ही की है। यहां कॉलोनाइजरों से ही उन लोगों को मुआवजा दिलाया जाना चाहिए जिन्हें मकान बनाने की अनुमति नहीं मिल रही साथ जिन्हें पहले अनुमति मिली है उसकी जांच भी होना चाहिए। तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा।