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शहर विकास पर करोड़ों रु. खर्च, नपा भवन पर ध्यान नहीं, दीवारें हो रहीं जर्जर

3 वर्ष पहले
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नगरपालिका परिषद ने 2002 में गांधी चौराहा पर नपा कार्यालय व शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया। तत्कालीन नपाध्यक्ष व वर्तमान विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने 70 लाख में सभी विभागाें के लिए भवन, परिसर में आकर्षक झरना, प्रवेश मार्ग पर आकर्षक लाइटिंग सहित कई काम कराए। सचिवालय की तर्ज पर उस समय आकर्षक भवन तैयार कराया लेकिन रखरखाव के अभाव में अब यह खंडहर बनता जा रहा है। जहां नपा शहर विकास पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही वहां 15 साल में खुद के भवन मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

पुराना भवन होने व जगह कम होने पर नपा परिषद ने करीब 2002 में गांधी चाैराहा पर नवीन नपा कार्यालय का काम शुरू कराया। तत्कालीन नगरपालिका परिषद व वर्तमान विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने 70 लाख रुपए में भवन तैयार कराया। इसमें 40 लाख की राशि कर्मचारियों की संचित निधि से ली गई जिसे बाद में धीरे-धीरे कर वापस जमा कराया गया। भवन में सातों सभापतियों के लिए अलग-अलग कमरे, नपाध्यक्ष सीएमओ के साथ सहायक इंजीनियरों को तक पर्सनल रूम की सुविधा उपलब्ध है। हर विभाग के लिए अलग-अलग सेक्शन बने हैं। 2002 में भवन को देख जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने इसे सचिवालय की तर्ज का भवन बताया लेकिन रखरखाव के अभाव में धीर-धीरे भवन जर्जर होता जा रहा है।

70 लाख रुपए खर्च कर कराया निर्माण, अब नहीं किया जा रहा रखरखाव
नपा कार्यालय के प्रवेश मार्ग पर लगी लाइटें बंद, दीवारें हो रहीं जर्जर।

शौचालयों व पानी की टंकी लीकेज होने से आ रही दिक्कत- विश्वपति शिवालय मंदिर की तरफ हर मंजिल पर बने शौचालयों व पानी की टंकी से पानी लीकेज होने पर दीवारें जर्जर हो रही हैं। सीलन की वजह से प्लास्टर निकलने लगा व दीवारों की मजबूती भी कमजोर होती जा रही है। लेकिन ढाई अरब का बजट पेश करने व शहर विकास का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि व अधिकारी स्वयं के भवन का रखरखाव नहीं कर रहे हैं। पंद्रह साल में किसी जनप्रतिनिधि व अधिकारी ने भवन की मरम्मत कराने का सोचा तक नहीं।

सुंदरता बढ़ाने वाले फव्वारे भी 10 साल से बंद
नपा कार्यालय की सुंदरता बढ़ाने के लिए तत्कालीन परिषद ने परिसर में आकर्षक लाइटिंग वाले फव्वारे भी लगाए थे। इसमें चारा कौनों पर बने हाथियों की सूंड से पानी गिरता रहता था व मध्य में मटका लेकर खड़ी महिला के मटके से झरना चलता था लेकिन यह झरना तीन से चार सालों तक ही चला। करीब दस साल से झरना बंद है, चारों कौनों पर बने हाथियों की सूंड तक गायब हो गई, पानी में कांजी तक जम रही लेकिन जिम्मेदारों को यह सब नहीं दिख रहा।

इस साल बजट में रखी राशि
मामले में नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार का कहना है कि कार्यालय की हालत खराब हो रही है। इसकी मरम्मत के लिए इस साल बजट में 25 लाख की राशि को रखा है। इस राशि से भवन मरम्मत का काम कराया जाएगा, जिसके लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। इसमें दीवारों की मरम्मत व फव्वारों को चालू किया जाएगा। लाइटिंग व्यवस्था गड़बड़ की जानकारी नहीं है यदि लाइटें बंद है तो उसे तुरंत सही कराया जाएगा।

विद्युत व्यवस्था भी बंद
नपा द्वारा शहर में 34 हजार से अधिक विद्युत पोल का रखरखाव कर विद्युत व्यवस्था को सुचारू रखा जाता है। इसके लिए नपा हर साल तीन से चार करोड़ रुपए खर्च करती है। लेकिन नपा स्वयं के भवन में लाइटिंग का काम नहीं करा पा रही हे। गांधी चौराहा से परिसर में नीचे जाने वाले रास्ते पर प्रारंभ में दोनों तरफ परिषद ने आकर्षक पोल व लाइटिंग लगाई जो विगत कई महीनों से बंद है। नपा कार्यालय शाम को बंद हो जाता है लेकिन नीचे दुकानदार व लोगों को आना-जाना इसी मार्ग से होता है। इसके बाद भी नपा द्वारा विद्युत व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा जा रहा।

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