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पानी सहजने में जुटी संस्था अनुराग, 18 साल में 1800 घरों में लगवा दिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

3 वर्ष पहले
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जल संवर्धन को लेकर प्रशासन और उसके जिम्मेदार भले ही उदासीन हो लेकिन शहर की अनुराग संस्था बीते 18 साल से इसी दिशा में काम कर रही है। मई 2000 में संस्था सदस्यों ने लोगों को पानी के लिए परेशान होते देखा तो लोगों को पानी सहेजने के लिए प्रेरित करने का अभियान ही छेड़ दिया। संस्था की समझाइस पर पहले ही महीने में 28 परिवारों ने अपने-अपने घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा लिए। इसके बाद से अब तक संस्था 1800 से अधिक भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवा चुकी है।

संस्था ‘अनुराग’ के मुखिया गोपाल पंचारिया ने 21 साल पहले लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए संस्था का गठन किया था। 15 सदस्यीय इस संस्था ने मदद की शुरुआत भजन-कीर्तन के माध्यम से की। लोगों की समस्या पताकर जिम्मेदारों तक पहुंचाया और उनका समाधान किया। 1998 में जिले के जगतपुरा गांव में लोगों को पानी के लिए परेशान होते देखा। 20 दिन के प्रयास में ही सस्था को इसके समाधान में सफलता मिल गई। 2000 में सूखे के हालात बने। इसके बाद संस्था की सोच और अभियान ही बदल गया। पंचारिया सहित सदस्यों ने जल संवर्धन के लिए समर्पित होकर काम करने की ठान ली। घर-घर जाकर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के फायदे बताकर लोगों को जागरूक किया। लगाने में समस्या आई तो तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध करवाया। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम 4 से 5 हजार रुपए तक में लग जाता और इतना खर्च वह व्यक्ति वहन कर लेता है जिसके घर में यह लगना है। फिर भी यदि किसी को दिक्कत आती है तो संस्था सदस्य आर्थिक मदद भी करते हैं।

भजन-कीर्तन कर जानते थे लोगों की समस्या, 2000 में सूखा देखा तो जलसंवर्धन में जुट गए

लोगों को प्रेरित करने के साथ तकनीकी टीम भी उपलब्ध कराते हैं और जरूरत पर आर्थिक मदद भी करते हैं

शुरुआत में दिक्कत आई

संस्था को शुरुआत में लोगों को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के फायदे समझाने और उन्हें लगाने के लिए प्रेरित करने में काफी दिक्कत आई। वजह, लोग डरते थे कि कहीं बरसात का पानी कुएं में जाने से उसका पानी खराब न हो जाए। घरों पर सिस्टम लगवाने में भी लोगों में हिचक थी। इससे संस्था ने तकनीकी टीम की मदद से लोगों को समझाया तो उनका डर दूर होता गया और इसके सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो गए।

अभिनंदननगर में कृष्णकुमार जोशी ने संस्था की प्रेरणा से घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया।

... और कुएं का खारा पानी मीठा हो गया

रेलवे स्टेशन रोड पर शैलेंद्र सिंह ने संस्था की मदद से सात साल पहले घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाकर छत का पानी कुएं में छोड़ा। उन्होंने बताया पहले कुएं का पानी खारा था लेकिन तीन साल तक बरसात का पानी कुएं में जाने के बाद उसकाे पानी का स्वाद ही बदल गया, वह मीठा हो गया। वाटर लेवल पर भी फर्क पड़ा। अब मई-जून में भी कुएं का पानी कम नहीं होता। अभिनंदननगर निवासी कृष्णकुमार जोशी हों या अफीम गोदाम रोड निवासी राजेंद्र पोरवाल, इनके जैसे कई लोगों ने संस्था की प्रेरणा से जल संरक्षण के महायज्ञ में आहुति दे रहे हैं।

आमजन से पहले शासन-प्रशासन को समझना जरूरी

जल संवर्धन का महत्व आमजन से पहले शासन और प्रशासन को समझने की जरूरत है। जब तक शासन इसे लेकर सख्त व दृढ़ निश्चय नहीं होगा जलसंकट से निजात मिलना मुश्किल है। वर्तमान में जितनी बरसात होती है उससे कहीं ज्यादा भूमिगत जल लोग उलीच रहे हैं। इससे भू-जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इस समस्या का हल वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का ज्यादा से ज्यादा उपयोग ही है। गोपाल पंचारिया, संस्थापक - अनुराग संस्था

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