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नए सत्र से सरकारी स्कूलों में लागू होगा एनसीईआरटी कोर्स

3 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों के शिक्षक, अध्यापक अब पुराने तरीकों से बच्चों को नहीं पढ़ा सकेंगे। नए सत्र से बच्चों के साथ शिक्षकों को भी प्रोजेक्ट वर्क पर फोकस करना होगा।

स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षकों को ट्रेनिंग दे रहा है। इसके तहत जिले के 18 शिक्षकों को भोपाल भेजा है। इसके बाद अन्य शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। एक समान शिक्षा नीति लागू करने की कवायद के तहत शिक्षा विभाग नए सत्र 2018-19 से सरकारी स्कूलों में विभागीय कोर्स की जगह अब एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) का कोर्स पढ़ाया जाएगा। कोर्स की किताबों की छपाई और निःशुल्क वितरण का काम मप्र पाठ्य पुस्तक निगम ही करेगा। सरकारी स्कूल के बच्चे भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार रहेंगे, क्योंकि परीक्षा में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से जुड़े होते हैं। प्रोजेक्ट बेस्ड कोर्स होने से हर विषय को बच्चे आसानी से समझ और सीख पाएंगे। व्यवस्था जिले के पांचों ब्लाॅकों मंदसौर, गरोठ, भानपुरा, सीतामऊ व मल्हारगढ़ में लागू होगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को मिलेगी मदद- एनसीईआरटी की किताबों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। चाहे सिविल सेवा की परीक्षा हो या पीईटी, पीएमटी, जेईईई सहित अधिकांश परीक्षाओं से जुड़े सवाल एनसीईआरटी की बुक्स से पूछे जाते हैं।

सीबीएसई-एमपी बोर्ड की पढ़ाई में कोई अंतर नहीं रहेगा

एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम लागू होने से सीबीएसई और एमपी बोर्ड की पढ़ाई में कोई अंतर नहीं रहेगा। अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाते थे। इससे एमपी बोर्ड के बच्चे हल नहीं कर पाते थे, लेकिन अब समान कोर्स होने से बच्चों को दिक्कत नहीं होगी। इसके अलावा देशभर में अगर समान शिक्षा लागू होती है तो बच्चों की समस्याएं खत्म हो जाएगी। आरएल कारपेंटर, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, मंदसौर

ऐसा होगा कोर्स

कक्षा 1 से 7- गणित, विज्ञान, पर्यावरण। 9वीं से 11वीं- गणित, विज्ञान, कॉमर्स। 8वीं, 10वीं से 12वीं- गणित, विज्ञान, कॉमर्स।

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