हृदयाघात का कारण विचाराघात है। यदि आप तनाव को जीवन में अपनाएंगे तो ह्दयाघात की आशंका बढ़ जाती है। जो आपके बस में नहीं है, उसके बारे में बिना कारण सोचना, बहस करना तनाव का कारण बनते हैं। जीवन में मेड (मेंटल रिलेक्सेशन, अवाईड एडिक्शन, डाइट कंट्रोल एक्सरसाइज) को अपनाएं।
यह बात मेदांता हाॅस्पिटल के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भारत रावत ने कही। वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), दशपुर योग शिक्षा संस्थान, जैन सोशल ग्रुप मेन एवं संगिनी जेएसजी मेन के संयुक्त तत्वावधान में दशपुरकुंज स्थित योेग केंद्र पर ह्दय रोग के कारण एवं बचाव विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए फल, सब्जी, अंकुरित नाश्ते को महत्व दें। अगर आप फल व सब्जी ज्यादा उपयोग में लाएंगे तो स्वस्थ रहेंगे। घर में बनी वस्तुओं का उपयोग करें ना कि बाहर के खाद्य पदार्थों व बेकरी में बने खाद्य पदार्थों का। सलाद, फल सेहत के लिए जरूरी हैं। ज्यादा मीठा और ज्यादा तेलीय वस्तुएं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। स्वास्थ्य के लिए फिल्टर तेल रिफाइंड तेल से बेहतर होता है।
सेमिनार
हृदय रोग के कारण एवं बचाव विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. भारत रावत ने टिप्स दिए, खान-पान व जीवन शैली पर ध्यान देने का कहा
‘मन को स्थिर रखना आवश्यक, जब भी मौका मिले ठहाके लगाकर हंसें’
दशपुरकुंज स्थित योेग केंद्र पर ह्दयाघात से बचाव के उपाए बताते डॉ. रावत
जन्मदिन पर बुराई का त्याग करें
अवाईड एडिक्शन को परिभाषित करते हुए डॉ. रावत ने कहा कि बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू जैसी बुराइयों का अपने जन्मदिन पर त्याग कर परिवार को गिफ्ट दें। इससे समाज में मान-सम्मान भी बढ़ेगा। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। अपने ऐब को त्यागें। जब किसी चीज के गुलाम या एडिक्ट हो जाते हैं उसे तुरंत बदल लेें।
डॉ. रावत ने कहा कि मन को स्थिर रखना आवश्यक है। तनावमुक्त रहने के लिए स्वयं के मन को स्थिर रखें और अनावश्यक ज्यादा ना सोचें। छोटी-छोटी बातों पर मूड खराब ना करें। हमेशा प्रसन्न रहने की कोशिश करें और जब भी मौका मिले ठहाके लगाकर हंसें। वर्तमान क्षण में खुद को स्थिर रखने की कोशिश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह प्रगति किसी काम की नहीं जिसमें आप अपने स्वयं के लिए समय ना निकाल पाएं।
योग व ध्यान अवश्य करें
रोज योग व ध्यान अवश्य करेें। एक्सरसाइज व योगा से मन की चिंता दूर होती है व शांति मिलती है। दो-तीन किलोमीटर नियमित पैदल चलेें। साथ ही कुछ खेलों को भी शौक रखें और उनके लिए समय जरूर निकालें।
‘बीपी-शुगर की नियमित जांच कराएं और रायचंदों से दूर रहें’
बीपी व शुगर की नियमित जांच कराएं। इसमें फैमिली डॉक्टर की राय लें ना कि रायचंदों की। पसीना और घबराहट होने पर यदि आपको लगता है कि हार्ट अटैक आया है तो एस्प्रिन अथवा डिस्प्रिन की दो गोलियां हृदयाघात के समय ली जा सकती हैं। इससे हृदयाघात से होने वाली मृत्यु को 25 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। ऐसे समय ईसीजी जरूर कराएं। सेमिनार का शुभारंभ आदि शंकराचार्य द्वारा रचित निर्वाण षट्कम से हुआ। डॉ. रावत का परिचय आईएमए अध्यक्ष डॉ. विमल मेहता ने दिया। स्वागत उद्बोधन जेएसजी अध्यक्ष अशोक मारू ने दिया। योग संस्थान उपाध्यक्ष सी.ए. दिनेश जैन, सचिव जितेश फरक्या, जेएसजी सचिव अजय पोरवाल, विनीता सिंघवी सहित क्लब सदस्य मौजूद थे।