पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • लहसुन उत्पादक को लागत राशि के मान से अनुदान का लाभ मिले

लहसुन उत्पादक को लागत राशि के मान से अनुदान का लाभ मिले

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मंदसौर | जिले सहित संपूर्ण मालवा क्षेत्र के किसान रबी की प्रमुख फसल लहसुन का सर्वाधिक रकबे में बुआई करते आ रहे है। लहसुन फसल की प्रति बीघा लागत राशील लगभग 40 हजार रुपए आती है। इस वर्ष किसानों को लहसुन के वाजिब दाम नही मिलने और लागत राशि भी नही निकलने से किसानों में हाहाकार मचा हुआ है।

जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष महेंद्रसिंह गुर्जर ने कहा मुख्यमंत्री ने पहले भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को गुमराह किया लेकिन जब भावांतर योजना में किसानों को लाभ हनी मिल रहा है तो केवल पंजीकृत किसानों को ही ऊंट के मुंह में जीरे के समान अनुदान राशि देने देने की घोषणा कर किसानों को गुमराह करने का कार्य किया जा रहा है। जबकि ऐसी परिस्थितियों में सरकार को सभी लहसुन उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 2 हजार रुपए अनुदान राशि दी जानी चाहिए। ताकि किसानों को फसल की लागत राशि मिल सके। गुर्जर ने कहा कि किसानों को भावांतर हनी अपनी लहसुन फसल का लागत राशि के मान से उचित दाम चाहिए। और सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसानों को उचित लाभ हनी मिल रहा है इस स्थिति में कम से कम लागत राशि के रूप में सभी लहसुन उत्पादक किसानों को अनुदान का लाभ दिए जाने की मांग सरकार से की है।

फसलों को भावांतर नहीं बल्कि समर्थन मूल्य दे सरकार

मंदसौर |
सरकार फसलों को भावांतर नहीं बल्कि समर्थन मूल्य दे। जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मुकेश काला ने बताया सरकार ने पहले भावांतर योजना में फसलों की सूची घोषित की, कांग्रेस के दबाव के बाद लहसुन को इसमें शामिल किया लेकिन भावांतर योजना में मॉडल मूल्य आधारित बड़ी शर्तें डालते हुए बड़े पैमाने पर किसानों को योजना से अपात्र कर दिया गया है। अगर सरकार की मंशा किसान हितैषी है तो वह तत्काल लहसुन सहित अन्य फसलों के लागत मूल्य के आधार पर समर्थन मूल्य घोषित करे। काला ने कहा लहसुन के दाम गिरने के पीछे सरकार व उद्योगपतियों की सांठगांठ है। एक ओर सरकार ने लहसुन को भावांतर में शामिल करते हुए 1600 रुपए के मॉडल मूल्य को मापदंड बना दिया लेकिन प्रदेश की किसी भी मंडी में किसानों द्वारा लाए जा रहे माल का 50%ही इस मॉडल मूल्य के आधार पर पहुंच रहा है। ऐसे में भावांतर योजना से पीछे के दरवाजे से सरकार ने किसानों को बाहर कर दिया है।

खबरें और भी हैं...