किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने के प्रयास ने
किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने के प्रयास ने इन दिनों नए तरह का वोट बैंक तैयार किया है। चहुं ओर हिंसक ध्वनियां, प्रतिशोध के स्वर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। धर्म के नाम पर सत्ता प्राप्ति के सफल प्रयोग के बाद अब जाति और वर्ण राजनेताओं की पहली पसंद बने हैं। साम्प्रदायिक विभाजन के बाद अब वर्ण व्यवस्था के पुनर्स्थापना का प्रयास निश्चित ही राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाएगा। आर्यावृत के नाम पर विशाल भारत वर्ष ऐसे ही कारणों से खंडित होता रहा है। सामंत काल में भी राज्य लिप्सा में राजा आपस में ही लड़ते रहे। ऐसी ही लालसा पुन: परवान पर है। समरसता के दिखावटी प्रयास मौन है। जिम्मेदार राजनीतिक दखल के कारण पंगु है। नामसिंह चंदवानी, मंदसौर
ग्रीष्म ऋतु में शालाओं का लगना छात्रों के लिए त्रासदायी होता है ।वार्षिक परीक्षा देने के बाद, छात्र की मानसिक परिस्थिति कुछ ओर होती है ।ऐसे में तपते हुए कक्षों , बाहर चिलचिलाती लू के लपटे मारती धूप , सूखते पानी के हैंड पंप आखातीज जैसे मांगलिक कार्यों की अधिकता के दिवसों में छात्रों को शाला जाने का दंश झेलना पड़ता है । कई बार कक्षाएं सूनी रहती है । ऐसे में शिक्षक-शिक्षिकाओं के द्वारा नाच -गाने की गतिविधि कर शाला में आने के लिए आकर्षित करना दोनों पक्षों की ओर से कितना दिल से लिया जाता है विचारणीय है ।ऐसे में शैक्षिक नीतियां बनाने से पहले सामाजिक ,प्राकृतिक वातावरण , व शालाओं की व्यवस्था -कमियों , कठिनाइयों , उचित प्रबंधन का ध्यान रखना अति आवश्यक है । भगवती प्रसाद गेहलोत , मंदसौर ।
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आम जनता भ्रष्टाचार, महंगाई, नेताओं, अधिकारियों की उपेक्षा के कारण दुखी है। नेताओं द्वारा जनहित में काम करने पर जनता द्वारा दिल से वाह-वाह की आवाज नहीं निकले तब तक लोकतंत्र को शक्ति मिलने वाली नहीं है। केवल चुनाव के दिनों में आम जनता, कार्यकर्ताओं से मीठा बोलने से काम नहीं चलेगा। नेताओं में अच्छे आचरण की प्रवृत्ति स्थाई रूप से होगी तब गण मजबूत होगा। यह कटु सत्य है कि गांधीजी का नाम लेने से काम चलने वाला नहीं है, उनके आचरण का अनुसरण करना पड़ेगा। -विक्रम विद्यार्थी, मंदसौर