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बामनवास गांव में रूंझ की जहरीली फलियां खाने से 36 भेड़ें मरीं,16 बीमार

3 वर्ष पहले
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बोबाड़ी ग्राम पंचायत के बामनवास गांव में शुक्रवार को रूंझ की जहरीली फलियां खाने से दो चरवाहों की 36 भेड़ों की मौत हो गई जबकि 16 भेडें बीमार हो गई। फुलेरा निवासी जगदीश गुर्जर एवं सांभर निवासी हनुमान गुर्जर इस समय पशुओं को चराने के लिए बामनवास आए हुए थे। रोजाना की तरह अपनी भेड़ों को चराने के लिए निकले थे। चरते -चरते भेड़ सर गांव के पास एक खेत में पंहुच गई जहां रूंझ की जहरीली फलियां खा गई। इसके कुछ देर बाद ही भेड़ें जमीन पर गिर कर तड़पने लगी। एक के बाद एक भेडों का गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। भेड़ों की हालत देख चरवाहों के हाथ पांव फूल गए। वे चिल्लाते हुए भेडों को सम्भालने में जुट गए। शोर सुन कर ग्रामीण मौके पर पहुंच गए एवं मनोहरपुर थाना पुलिस एवं पशुचिकित्सालय को सूचना दी। इस दौरान भेड़ों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। हनुमान की 25 व जगदीश की 11 भेडों ने 1 घंटे के अंदर दम तोड़ दिया। चन्दवाजी से पशु चिकित्सक महेन्द्र सिंह गुर्जर एवं मनोहरपुर से राजेश गुप्ता मौके पर पहुंचे एवं बीमार भेड़ों का उपचार किया। मनोहरपुर पुलिस थाना पुलिस ने भी मौके पर पहुंच कर हालात का जायजा लिया। सरपंच संघ अध्यक्ष बाबूलाल मीणा ने भी पीडितों को ढाढस बंधाया। पशुचिकित्सक डॉ. महेन्द्र सिंह ने बताया कि रूंझ की सूखी फलियों में कभी कहर बन जाता है। मृत भेडों का पोस्टमार्टम किया गया।

गठवाड़ी. जहरीली फलियां खाने से बीमार भेड़ों को संभालते ग्रामीण।

काश चिकित्सालय में होता पशुचिकित्सक
बोबाड़ी पशुचिकित्सालय में पशुचिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। अशोक शर्मा, सुनील शर्मा आदि का कहना था कि सूचना के बाद मनोहरपुर एवं चंदवाजी से चिकित्सकों को आने में काफी समय लग गया। यदि बोबाड़ी में पशुचिकित्सक होता तो भेड़ों को समय पर उपचार मिल जाता एवं उनकी जान बच सकती थी। लोगों ने पशुचिकित्सा विभाग के विरुद्ध आक्रोश जताया। कहा कि पहले भी एेसे हादसे हो चुके हैं लेकिन विभाग चिकित्सक की नियुक्ति नहीं कर रहा है। लोगों ने शीघ्र पशुचिकित्सक नियुक्त करने की मांग की।

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