मासलपुर| कस्बे में स्टोनमार्ट को विकसित कराने के लिए जनवरी माह में राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम लिमिटेड जयपुर की ओर से 54 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की है,लेकिन पांच माह गुजरने के बाद भी कस्बे में स्टोनमार्ट के क्रियान्वयन की कार्यवाही नहीं हो सकी है। जिससे क्षेत्र क पत्थर व्यवसायी,शिल्प कारीगर व लोगों की रोजगार की आस पूरी नहीं हो पा रही है तथा आज भी क्षेत्र से रोजगार के लिए कई युवाओं को दूरदराज के शहरों में जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2010-11 की बजट घोषणा में मासलपुर में स्टोन मार्ट स्थापित कराने की घोषणा की। इसके लिए भूमि का आबंटन करने के साथ किसानों की भूमि को अवाप्त कर उन्हें सरकार ने मुआवजा भी दे दिया है,लेकिन अभी तक स्टोनमार्ट पर्यावरण से मंजूरी नहीं मिलने से क्रियान्वयन नहीं हो सका। इसके लिए 26 अक्टूबर 2015 में पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने कस्बे में जनसुनवाई शिविर का आयोजन किया। जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने स्टोनमार्ट के स्थापित किए जाने में अनापत्ति जाहिर की।
इसके फलस्वरूप 20 जून 2016 में पर्यावरण से स्वीकृति भी मिल गई। गांवों में अधिकांश परिवार पत्थर व्यवसाय से परिवार का भरण पोषण कर रहे है और यहां से उत्पादित पत्थर को उत्तरप्रदेश की मंडियों में भेजा जा रहा है। इससे व्यवसायियों को वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है।
दैनिक भास्कर में स्टोनमार्ट की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। इसके बाद उद्योग विभाग ने स्टोनमार्ट विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर जनवरी माह में 54 करोड़ की राशि की स्वीकृति भी जारी कर दी। मासलपुर में 280 एकड़ भूमि पर स्टोन मार्ट स्थापित किया जाएगा,लेकिन स्टोनमार्ट के क्रियान्वयन कराने के लिए वित्तीय स्वीकृति मिलने के पांच माह बाद भी स्टोनमार्ट के क्रियान्वयन की कार्यवाही शुरू नहीं की गई है।
मासलपुर. स्टोनमार्ट के लिए आवंटित जमीन, जहां पर स्टोनमार्ट विकसित होगा।