झारखंड के 60% एटीएम में कैश नहीं, 8 अन्य राज्यों में भी किल्लत
भास्कर टीम ने राज्य के 17 जिलों के 445 एटीएम की जांच की, इनमें से 268 एटीएम में कैश नहीं मिला
बैंक नोट प्रेस में चौबीसों घंटे नोटों की छपाई शुरू
भास्कर टीम | रांची/नई दिल्ली
नोटबंदी के 18 महीनों बाद एक बार फिर एटीएम में पर नो कैश के बोर्ड दिख रहे हैं। कैश की कमी बैंकों में भी है। इस संकट का अंदाजा इसी बात से लगता है कि स्टेट बैंक की रांची शाखा की लिमिट 1600 करोड़ रुपए की है। लेकिन मंगलवार को बैंक में मात्र 52 करोड़ रुपए ही थे। झारखंड में विभिन्न बैंकों के कुल 3540 एटीएम हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने 17 जिलों में विभिन्न बैंकों के 445 एटीएम की जांच की। पता चला इनमें से 268 एटीएम ऐसे हैं जिनमें कैश नहीं है। जिन एटीएम से पैसे निकल रहे हैं वहां लंबी लाइन लगी हुई है। यही नहीं, झारखंड समेत देश के नौ राज्यों में एटीएम में नकदी नहीं मिलने की शिकायत आ रही है।
इनमें आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, बिहार, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र शामिल हैं। पिछले कुछ दिनों से आ रही शिकायतों पर जब विपक्ष हमलावर हुआ तो सरकार ने सफाई दी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि पिछले तीन महीने में नकदी की मांग दोगुनी हो गई है। जबकि, अप्रैल के शुरुआती 13 दिन में ही सामान्य की तुलना में पांच गुना ज्यादा करेंसी निकाली गई। अब सरकार 500 के नोटो की छपाई पांच गुना बढ़ाने जा रही है। मध्यप्रदेश के देवास की बैंक नोट प्रेस में तीन शिफ्टों में चौबीसों घंटे नोटों की छपाई शुरू कर दी गई है।
पिछले दो हफ्ते में रोज 3,461 करोड़ रु. निकाले गए, इसलिए हुई कैश की किल्लत
भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट
स्थान एटीएम देखे बंद/कैश नहीं
रांची 44 34
जमशेदपुर 50 26
धनबाद 54 48
मेदिनीनगर 20 19
घाटशिला 15 08
सिमडेगा 11 06
कोडरमा 79 12
लातेहार 10 08
चक्रधरपुर 14 10
गुमला 23 16
चाईबासा 22 12
बोकारो 42 28
गिरिडीह 12 10
हजारीबाग 11 07
रामगढ़ 12 06
चतरा 12 08
जामताड़ा 14 10
कुल 445 268
क्या हुआ: जनवरी से ही करीब दोगुनी हो गई थी नकदी की मांग
देश में हर माह 19-20 हजार करोड़ रुपए नकदी की मांग रहती है। इसी हिसाब से सप्लाई होती है। लेकिन जनवरी से मांग दोगुनी हो गई। जनवरी-मार्च में हर माह 40 से 45 हजार करोड़ रुपए सप्लाई किए गए। डिमांड बढ़ने के चलते सरकार के पास नकदी का स्टॉक कम हो गया। अप्रैल के शुरुआती 13 दिन में 45,000 करोड़ रुपए की डिमांड रही। सामान्य हालात में 13 दिन में 8.45 हजार करोड़ रुपए की ही डिमांड होनी चाहिए। लेकिन यह मांग पांच गुना ज्यादा यानी 45,000 करोड़ रुपए रही। यानी रोज 3,461 करोड़ रुपए निकाले गए।
मौजूदा हालात
18 लाख करोड़ रु. सर्कुलेशन में, 1.75 लाख करोड़ सरकार के पास
राहुल बोले- नोटबंदी का आतंक दोबारा छाया
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तुकबंदी करते हुए कहा, समझो अब नोटबंदी का फरेब, आपका पैसा नीरव मोदी की जेब। मोदीजी की क्या माल्या माया, नोटबंदी का आतंक दोबारा छाया। देश के एटीएम सब फिर से खाली, बैंकों की क्या हालत कर डाली।’ राहुल ने प्रधानमंत्री पर बैंकिंग सेक्टर बर्बाद करने का भी आरोप लगाया है। वहीं, ममता बनर्जी ने कहा, ‘कई राज्यों में एटीएम में पैसा नहीं होने की खबरें देखीं। बड़े नोट गायब हैं। नोटबंदी के दिनों की याद आ गई।’
राज्यों और आरबीआई में कमेटी बनाकर राज्यों के बीच करेंसी का असंतुलन खत्म किया जाएगा। इसमें दो-तीन दिन लगेंगे। - शिव प्रताप शुक्ला, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने बताया कि सरकार के पास अभी 1.75 लाख करोड़ रु. की करेंसी है। आमतौर पर सरकार के पास ढाई से तीन लाख करोड़ का स्टॉक होता है। नोटबंदी के वक्त देश में लगभग 17.15 लाख करोड़ रु. सर्कुलेशन में थे। अभी करीब 18 लाख करोड़ रु. सर्कुलेशन में हैं।
क्यों : 70% एटीएम 200 के नोट के लिए कैलिब्रेट नहीं
अभी करीब 18 लाख करोड़ रुपए की नकदी सर्कुलेशन में है। इसमें से 6.7 लाख करोड़ रुपए 2000 के नोटों में हैं। सरकार के अनुसार लोगों के पास गए 2000 के नोट वापस नहीं आ रहे। 2000 के नोटों की छपाई भी बंद की जा चुकी है। वहीं, 200 के नोटों के लिए सभी एटीएम कैलिब्रेट नहीं हुए हैं। सिर्फ 30% एटीएम ही 200 के नोटों के लिए कैलिब्रेटेड हैं। औसतन 30% एटीएम हर वक्त खराब रहते हैं। 2000 के नोट एटीएम में डालने पर 60 लाख रुपए तक आते हैं। लेकिन, 500, 100 और 200 तक के नोट डालने पर यह क्षमता 15-20 लाख रुपए रह जाती है।
पर्याप्त कैश है, जल्द दूर होगी समस्या वहीं कैश की किल्लत पर हमने पटना मुख्यालय से जानकारी मांगी है। - संजीव दयाल, प्रभारी महाप्रबंधक रिजर्व बैंक झारखंड