अफवाह के बीच भरा रहा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का आवेदन फार्म
लोगों में यदि जागरूकता का अभाव हो तो कोई भी छोटी सी चीज एक बहुत बड़ी अफवाह का रूप ले लेती है । इसकी एक बानगी स्थानीय प्रधान डाकघर में देखने को मिल रही है। जहां ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को एक आवेदन फॉर्म को रजिस्ट्री करने को लेकर सुबह से लाइनों में खड़ा किया जा रहा है। जब लोगों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत आवेदन जमा कर रहे हैं। आवेदन फॉर्म में वैसे अभिभावक जिनकी बेटी की आयु 8 वर्ष से 32 वर्ष के बीच में है। उन्हें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बेटियों को दो लाख की राशि दी जाएगी। 12 करोड़ की शुरुआती राशि के साथ योजना को 120 जिलों में शुरू की गई है, ऐसी जानकारी आवेदन में दी गई है। आवेदन को भारत सरकार रक्षा मंत्रालय एवं बाल विकास मंत्रालय के पते पर भेजना है। योजना ग्राम और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए है। इसमें यह सच्चाई है या अफवाह इस बात की पड़ताल के लिए प्रधान डाकघर के सहायक गणेश पांडे से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि डाकघर के द्वारा बोर्ड लगाकर यह जानकारी दे दिया जा चुका है कि लोगों द्वारा जिस पते पर आवेदन भेजा जा रहा है वह पता ही गलत है। इसके बावजूद भी लोग प्रतिदिन आवेदन के लिए रजिस्ट्री करा रहे हैं। लोगों को रजिस्ट्री कराने में 27 रुपये का खर्च भी आ रहा है।
मुखिया के द्वारा किया जा रहा है अभिप्रमाणित
आवेदन फॉर्म भरने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपने स्थानीय मुखिया से हस्ताक्षर व अभिप्रमाणित करवाना है। आवेदन फॉर्म भरने में अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्र के हैं। पांकी,लेस्लीगंज, सुआकोडिया,चिंयाकी, पाटन ,चैनपुर, सहित कई जगह के लोग आ रहे हैं।
लोगों की लगी रहती है लंबी लाइन है
आवेदन फॉर्म जमा करने के लिए दिनभर लोगों की लाइनें लगी रहती है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले सभी लोग 10 से 12 फॉर्म को साथ में लेकर आते हैं और परिवार के अन्य लोगों के साथ भी लाइनों में खड़े रहते हैं। जिससे प्रधान डाकघर में कार्य कराने आए अन्य लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है। लोगों की लाइन इतनी लंबी हो जाती है कि वह प्रधान डाकघर के बाहर परिसर तक लगी रहती है।
दलालों की हो रही है अच्छी कमाई
आवेदन फॉर्म जमा करने में ग्रामीण क्षेत्र से आए भोले भाले लोगों को स्थानीय दलालों के द्वारा भी खूब बेवकूफ बनाया जा रहा है। फॉर्म भरने और उसे जमा करने के नाम पर ग्रामीणों से 100 से 200 रुपये तक लिए जा रहे हैं।