हुसैनाबाद में स्थित जपला सीमेंट फैक्ट्री।
पीएम ने कहा था-बहुमत मिला तो फैक्ट्री खोलेंगे
लोकसभा चुनाव के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेदिनीनगर में चुनावी सभा में कहा था कि देश मे बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनती है तो फैक्ट्री को खोलना प्राथमिकता होगी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी हैदरनगर में यह आश्वासन दिया था। इसके अलावे मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा ने कारखाना जाकर स्थल निरीक्षण किया, लेकिन कारखाना खोलने के लिए कोई सार्थक पहल नहीं हुई। इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद वीडी राम को गृहमंत्री राजनाथ सिंह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फैक्ट्री खोलने का आश्वासन मिला था। वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी हरिहरगंज आगमन के दौरान शीघ्र फैक्ट्री खोलने की बात कही थी, लेकिन प्रत्यक्षत: कुछ नहीं हुआ।
पूर्व विधायक संजय सिंह यादव और अन्य।
केंद्र और राज्य ने फैक्ट्री का किया अस्तित्व समाप्त : संजय
राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव सह पूर्व विधायक संजय कुमार सिंह यादव ने शुक्रवार को पुरन्दर बीघा स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता कर कहा कि राज्य और केंद्र ने मिलकर फैक्ट्री का अस्तित्व समाप्त कर दिया। जपला सीमेंट कारखाना की नीलामी क्षेत्र के लिए दुर्भाग्य है। उन्होंने प्रदेश में रघुवर सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर सरकार नीलामी को स्टे कराने के लिए तीन-चार माह पूर्व में पहल करती तो कारखाना की नीलामी न्यायालय द्वारा रुक सकती थी। प्रेसवार्ता में राजद के कलामुद्दीन खान, नगर अध्यक्ष शशि कुमार, पचू रजवार, कामख्या नारायण सिंह आदि मौजूद थे।
1992 से बंद है फैक्ट्री
जपला सीमेंट फैक्ट्री का इतिहास गौरवशाली रहा है। फैक्ट्री की स्थापना 1917 में मार्टिन बर्न कंपनी ने की थी। 1984 तक कंपनी का प्रबंधन कई लोगों के हाथों में रहा। 1985 को कंपनी बंद हो गई। पांच साल बाद इसे चालू किया गया। तब बिहार सरकार ने सहयोग के रूप में पांच करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी, जिसमें से प्रबंधन को 2.5 करोड़ राशि ही मिली। इस दौर के प्रबंधक एसपी सिंहा ने वित्तीय संकट का हवाला दिखाते हुए फैक्ट्री को 28 मई 1992 को बंद कर दिया। इसके बाद से आज तक फैक्ट्री बंद है। उस समय 5000 हजार मजदूर कार्यरत थे। बंदी के मजदूरों ने पटना हाईकोर्ट में बकाए मजदूरी के भुगतान के लिए दावा ठोका। वर्ष 1916 में पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिक्विडेटर नियुक्त किया गया, ताकि बैंक व मजदूर के बकाया राशि को निर्धारित कर सके।