भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार लोकसभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखते हुए मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर बैठक डीसी की अध्यक्षता में हुई। बैठक मे डीसी ने कहा कि पूर्ण मतदाता सूची तैयार करने के उद्देश्य से पूर्व में दी जाने वाले गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए अभी से जुट जाएं। डीसी ने अधिकारियों को पुनरीक्षण कार्य को विशेष ध्यान देकर गहनता से संपन्न कराने का निर्देश दिया। डीसी ने आयोग द्वारा प्री रिविजन एक्टीविटी को सम्पन्न कराने का निर्देश दिया, जिसके तहत जिला स्तर पर ईआरओ, एईआरओ व बीडीओ एवं प्रखंड स्तरीय निर्वाचन पर्यवेक्षक का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इसके लिए 21 मई को प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। पुनरीक्षण कार्यक्रम से पूर्व सभी मतदान कार्यक्रम पर एक बीएलओ पर्यवेक्षक तथा 10 मतदान केंद्रों पर एक बीएलओ पर्यवेक्षक नियुक्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी बीएलओ व सुपरवाइजर को पुनरीक्षण अवधि से संबंधित समय प्रदान करने को कहा है। सभी प्रभारी इस कार्य को संपादित करते हुए बीएलओ व सुपरवाइजर की सूची हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में जिला निर्वाचन कार्यालय से 10 अप्रैल को उपलब्ध कराने को कहा है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जनसंख्या एवं मतदाता से संबंधित आकडे प्रपत्र एक से आठ में मतदान केन्द्रवार तैयार किए गए हैं।
उन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाना आवश्यक है, ताकि मतदाता सूचि में व्याप्त गैप को चिह्नित किया जा सकता है। उसी प्रकार मतदान केन्द्रों में दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की प्रविष्टि को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित किया जाए। आयोग के प्राप्त निर्देश के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1200 तथा शहरी क्षेत्रों में 1400 होना चाहिए। अगले चुनाव में वीवीपैट का उपयोग किया जाना है। इस लिए सभी मतदान केन्द्रों पर विश्लेषण करते हुए पूर्ण गठन का कार्य प्रारंभ किया जाए। साथ ही सभी मतदान केन्द्रों का भौतिक सत्यापन करते हुए उपलब्ध सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए। संक्षिप्त पुनरीक्षण अवधि 1 सितंबर से 31 अक्टूबर तक चलेगी। उक्त अवधि में मतदाताओं से दावा, आपत्ति संबंधी, प्रपत्र पत्र प्राप्त किए जाएंगे।