सदर अस्पताल में एक महीने से नहीं है एंटी रैबीज सुई
सदर अस्पताल में पिछले एक महीने से एंटी रैबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। इससे सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 मरीज इस तरह के आते हैं, परंतु बिना इलाज कराएं निराश होकर लौटना पड़ता है।
जबकि बाहर में इलाज कराने में एक मरीज को 2000 के आसपास खर्च आता है, परंतु जो गरीब व्यक्ति है उसे बहुत ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार कंडा के 8 वर्षीय विकास कुमार पासवान को 3 मई को कुत्ता काट दिया था, परंतु जब उसके परिजन उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे तो पता चला कि यहां इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। वहीं अप्रैल माह में विश्रामपुर प्रखंड बघमनवा गांव के 13 वर्षीय सुनील कुमार चंद्रवंशी को भी कुत्ता काट दिया था, परंतु जब वह सदर अस्पताल आया उसे भी पता चला इंजेक्शन नहीं है।
पूरे मामले पर बसपा के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि एक इंजेक्शन की कीमत बाहर में 360 है। अगर पांच इंजेक्शन लगता है तो करीब ₹2000 का खर्च आता है। ऐसे में गरीब व्यक्ति के लिए यह कैसे संभव है।
परेशानी
कुत्ता काटने के 25 से 30 मरीज आते हैं रोजाना, पांच इंजेक्शन लगाने होते हैं, प्रति इंजेक्शन कीमत है 360 रुपए
कितना इंजेक्शन दिया जाता है एक मरीज को
मेदिनीनगर में स्थित सदर अस्पताल।
जिस व्यक्ति को कुत्ता काटता है उसे 5 इंजेक्शन दिया जाता है। जिसमें एक इंजेक्शन उसी दिन दिया जाता है। दूसरा इंजेक्शन तीसरे दिन, तीसरा इंजेक्शन सातवें दिन, चौथा इंजेक्शन 14वें तथा पांचवां इंजेक्शन 28 में दिन दिया जाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र दिया है : प्रभारी सिविल सर्जन
जिले के सिविल सर्जन डॉ कलानंद मिश्र छुट्टी पर हैं। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ आरके रंजन ने बताया कि हमें आज ही पता चला है कि एंटी रैबीज के इंजेक्शन नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय को इस संबंध में पत्र दिया गया है। जब वहां से आएगा तो यह लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा।