भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी (आंचलिक)
सोजटी गेट स्थित फूल माली समाज पंचायत भवन में आयोजित की जा रही भागवत कथा में सोमवार को महामण्लेश्वर श्री देवऋषि महाराज ने कहा कि दीन दुखियों की सेवा करने से ही मानव जीवन सार्थक हो सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों के लिए स्कूलों का निर्माण करवाना एवं चिकित्सालय खुलवाना बड़े पुण्य का काम है। नर सेवा नारायण से बढ़कर बताई है। कार्यक्रम के दौरान 109 वर्षीय रमा शंकरदास महाराज मौजूद रहे। जहां श्रद्धालुओं ने महाराज से आशीर्वचन लिए। इस अवसर पर बादराम सांखला, बुद्धि प्रकाश चौहान, पोकरदास वैष्णव, गंगाराम,बस्तीराम घांची, तुलसीराम तेली, मोहन सांखला, रामचन्द्र जादम, सुगन तेली, खेमजी जादम, नेमीचंद सांखला, ताराचन्द कच्छावा, भागीरथ, पांचाराम, रामनिवास तंवर, कानाराम चौहान, बस्तीराम गहलोत, राजेन्द्र कच्छावा, बाबूलाल, पाबूराम, भागीरथ, प्रहलाद घांची आदि श्रद्धालु मौजूद थे।
रेण में भी रामसागर तालाब स्थित खत्रियों के मोहल्ले में आयोजित की जा रही भागवत कथा
रेण में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ
रेण| रामसागर तालाब पर स्थित खत्रियों के रामद्वारा में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ 21 मई सोमवार को सुबह कलश यात्रा के बाद शुरू हुई। दूरसंचार एसोसिएशन के अध्यक्ष व समाज सेवी प्रेमराज अरोड़ा सप|ीक भागवत को अपने सिर पर रखकर कलश यात्रा के साथ चल रहे थे। कलश यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर कथावाचक रामस्नेही संत हरिराम शास्त्री ने भागवत कथा की संक्षिप्त जानकारी दी। इस मौके पर सरपंच राजकंवर स्वामी, समाजसेवी नरेंद्र स्वामी, गायत्री सेवा समिति के अध्यक्ष भरत शर्मा, व्यापारी नथमल पाटनी, पुखराज अरोड़ा, शिवप्रसाद फौजी, मनोज अरोड़ा, कार्तिक अरोड़ा, रमेश खत्री, सुरेश खत्री, भाजपा ग्रामीण मंडल सह संगठन मंत्री बी एल व्यास, युवा मोर्चा के नरेंद्र राजपुरोहित, समाजसेवक मोहन सिंह राजपुरोहित, चिंटू स्वामी, सुमित स्वामी, शिक्षित बेरोजगार संघ अध्यक्ष सुरेश राजपुरोहित, वार्ड पंच दिलीप सिंह, मुनीराम सोनी, रामकुमार, हुक्मीचंद सोनी मौजूद थे।
दधवाड़ा| लांबा जाटान में संत श्री सेवादास महाराज गौशाला प्रांगण में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को माता-पिता की सेवा व गुरु की महिमा के प्रसंग सुनाए। कथावाचक पंडित अशोक दाधीच महाराज ने कहा कि कुछ जीव ऐसे होते हैं जिनके ऊपर कितना भी उपकार करें, कितना भी उनको सुधारने का प्रयास करें सब विफल हो जाता है। लेकिन उनको कोई फर्क ही नहीं पड़ता। वह अयोग्य व्यक्ति कहलाते हैं। दूसरे वो है जो अपनी योग्यता को पहचानते ही नहीं, ना उपकार को पहचानते है ना उपकारी को पहचानते हैं। इसलिए उनमें योग्यता तो विद्यमान है लेकिन वो अपने आप में उपकार व उपकारी को न पहचानने के कारण वंचित रह जाते हैं। कथावाचक महाराज ने कहा कि उपकार की परिभाषा समझो, जिसको तुम दे रहे हो जिसकी तुम सेवा कर रहे हो वो तुम्हारे उपकारी हैं। उन्होंने कहा कि अपनों से बड़ों का सम्मान करना चाहिए। इस दौरान गौ सेवक रूपा राम भांबू, सुखा राम, नेमाराम भांबू,भंवरु राम, मेघाराम, कमल, धर्मेंद्र, सुरेश आदि मौजूद थे।