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मकराना में जहां सबसे ज्यादा गड़बड़ी वहां 4 पदों पर 5 सुपरवाइजर, ग्रामीण कार्यालय में सभी 8 पद खाली

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | मकराना/नागौर

महिला एवं बाल विकास विभाग में पोषाहार घोटाला, कमीशनखोरी के साथ ही मनचाही जगह पोस्टिंग के लिए जोड़-तोड़ का खेल भी चलता है। मकराना में शहरी और ग्रामीण दो सीडीपीओ कार्यालय हैं। इनके बीच दूरी केवल दो किलोमीटर है। ग्रामीण कार्यालय में एक भी सुपरवाइजर नहीं है। जबकि शहरी कार्यालय में पांच सुपरवाइजर लगी हैं। इनमें से दो ने तो ट्रांसफर होने के बाद भी ट्रिब्यूनल कोर्ट जयपुर से स्टे ले रखा है। मकराना ग्रामीण कार्यालय के अधीन 212 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जबकि शहरी कार्यालय के अधीन महज 144 केंद्र हैं।

भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाली बात सामने आई कि मकराना में सीडीपीओ रहते हुए उषा रानी के पास मकराना ग्रामीण और शहरी दोनों कार्यालयों का चार्ज था। उपनिदेशक पद पर पदोन्नत होने के बाद भी उन्होंने दूसरे अधिकारी को चार्ज नहीं दिया। शहरी कार्यालय में राजबाला शर्मा, इंदु कुमारी, सीता देवी, गायत्री देवी और मोना कुमावत सुपरवाइजर हैं। एक साल पहले मोना का मकराना ग्रामीण से शहरी कार्यालय में तबादला हुआ था। गायत्री देवी का मई 2018 में मकराना ग्रामीण कार्यालय में तबादला हो गया। गायत्री 2006 में पदोन्नत होकर सुपरवाइजर बनी थी। तब से वह मकराना शहरी कार्यालय में हैं। जबकि, निदेशालय ने 212 आंगनबाड़ी केंद्रों वाले ग्रामीण सीडीपीओ कार्यालय को 2 बाबूओं के भरोसे छोड़ रखा है।

भास्कर पड़ताल

मकराना. महिला एवं बाल विकास विभाग के शहरी परियोजना का कार्यालय।

दो बाबू के भरोसे छोड़ दिए 212 आंगनबाड़ी केंद्र

सीडीपीओ ग्रामीण कार्यालय में 212 केंद्रों की देखरेख के लिए 8 सुपरवाइजर के पद स्वीकृत हैं। वहां से सुपरवाइजर मोना कुमावत का एक साल पहले शहर कार्यालय में ट्रांसफर हो गया। मंजू का शिक्षक तृतीय श्रेणी में चयन होने पर वह इस्तीफा दे गई। रीता कुमारी का तबादला इस साल 22 मई को नवलगढ़ होने पर वह कार्यमुक्त होकर चली गई। मई 2018 में शहरी परियोजना में कार्यरत गायत्री का वहां ट्रांसफर हुआ। वह स्टे लेकर बैठ गई। अब ग्रामीण कार्यालय अकाउंटेंट जगदीश व बाबू मनीराम बिश्नोई के भरोसे है।

मैं मकराना की रहने वाली, सास की देखभाल करनी पड़ती है

मेरी पोस्टिंग 1996 की है। 2007 से मकराना में ही हूं। नवंबर 2016 में मेरा ट्रांसफर कर दिया गया था। इस पर ट्रिब्यूनल कोर्ट से स्टे ले लिया। मेरी सास बीमार है। उनकी देखभाल मेरे ही जिम्मे हैं। मैं रहने वाली भी मकराना की ही हूं। राजबाला शर्मा, महिला सुपरवाइजर

12 साल पहले खुला शहरी कार्यालय, अब ग्रामीण में मर्ज

केंद्र दूर हैं, मुझे स्कूटी चलानी नहीं आती, इसलिए स्टे लेना पड़ा

शहरी परियोजना की शुरुआत के समय ही प्रमोशन पर मुझे मकराना लगाया था। मई 2018 में मेरा ट्रांसफर मकराना ग्रामीण में हुआ था। पांच माह पहले पेट का ऑपरेशन हुआ है। गांवों में केंद्र दूर-दूर हैं। मुझे स्कूटी चलानी भी नहीं आती है। इसलिए ट्रांसफर पर स्टे ले लिया। गायत्री देवी, महिला सुपरवाइजर

आंगनबाड़ी केंद्र पहले गांवों में ही होते थे। शहरी क्षेत्र के लिए 2006 में परियोजना शुरू कर मकराना में अलग से परियोजना कार्यालय खोला गया। इसमें मकराना नगर पालिका, कुचामन, मेड़ता सिटी, नावां और परबतसर पालिका क्षेत्र के केंद्रों की देखरेख का जिम्मा है। पांच पालिका क्षेत्र को चार सेक्टर में विभाजित कर चार पद पर पांच सुपरवाइजर लगा रखे हैं। एक सुपरवाइजर ने बताया कि मकराना शहरी परियोजना इसी महीने बंद हो रही है। मकराना पालिका क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों को ग्रामीण परियोजना में ही मर्ज किया जाना है। अब इसका कार्यालय नावां में होगा। सभी आदेशों का ही इंतजार कर रहे थे कि डीडी के एसीबी ट्रैप की कार्रवाई में फंसने से आदेश अटक गए।

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