भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी (आंचलिक)
शहर के व्यवसायी गौतम चंद माली करीब तीन वर्ष पहले एक अंतिम यात्रा में श्मशान पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि श्मशान की स्थिति बदहाल है। उसी समय इसकी साफ-सफाई करने की ठान ली। इसके अगले ही दिन वो श्मशान पहुंचे और यहां पर साफ-सफाई शुरू कर दी। तीन साल तक श्रमदान करते रहे। उनके इस कार्य से प्रेरित होकर अन्य लोग भी जुड़ते चले गए। इन्होंने चून्दिया रोड स्थित माली समाज श्मशान की दशा ही बदल दी। गौतम ने श्मशान भूमि को हरा-भरा बनाने के लिए 500 से अधिक पौधे लगाए। जिसमें रंग-बिरंगे फूलों की कनेर, एनर्मी, पीपल, नीम, शीशम आदि के पौधे लगाए गए। साथ ही श्मशान परिसर में दूब लगाकर पार्क का रूप भी दिया है। इन सभी पेड़ों पर पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधे हैं। जिनमें रोज पानी भरते हैं। गौतम ने लोगों को जोड़ते हुए भामाशाहों के सहयोग से दो कमरों के अलावा एक बड़े बरामदे का निर्माण भी करवाया है। गत तीन सालों से वे सुबह 6 बजे नियमित रूप से श्मशान जाकर साफ-सफाई करते हैं। झाडू लेकर पूरे परिसर व रास्ते में झाडू लगाते हैं। इसके बाद में परिंडों को धोकर स्वच्छ पानी भरते हैं।
बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से पिलाते हैं पेड़ों का पानी
गौतम चंद श्मशान भूमि पर लगे पेड़ों को पानी पिलाने में भी पानी की बचत करते हैं। वो पौधों की बूंद-बूंद पद्धति से सिंचाई करते हैं। जिससे पानी व्यर्थ में जाए। साथ ही पेड़-पौधों का विकास भी निरंतर हो रहा है। गौतम बताते हैं कि वे रोजाना यहां पहुंच कर श्रमदान करते हैं। यदि किसी दिन कारणवश नहीं जा पाते हैं तो मन को सुकून नहीं मिलता है।
श्मशान में बने रास्ते पर रोज लगाते हैं झाड़ू, जल संरक्षण को लेकर पेड़ों को पानी पिलाने के लिए लगवाया बूंद-बूंद सिंचाई सिस्टम
माली समाज श्मशान में झाडू लगाते गौतम।